कोलकाता, चार मई (भाषा) पश्चिम बंगाल का राजनीतिक नक्शा बदलने वाली ममता बनर्जी ने न सिर्फ 15 वर्षों के पने शासन वाले राज्य में सत्ता गंवा दी है, बल्कि उन्हें पने राजनीतिक गढ़ भवानीपुर में भी करारी शिकस्त मिली।
तृणमूल कांग्रेस, सरकार विचारधारा को एक ही धुरी पर लाने वाली पार्टी प्रमुख के लिए बंगाल में जनता का फैसला केवल चुनावी नहीं है, बल्कि स्तित्व का सवाल बन गया है। भाजपा ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर तृणमूल के 15 साल के शासन का ंत कर दिया है, जबकि राजनीतिक रूप से उसे बनर्जी के गृह क्षेत्र भवानीपुर सीट पर हार से भी बड़ा झटका लगा है, जहां भाजपा के शुभेंदु धिकारी ने उन्हें 15,000 से धिक मतों के ंतर से हराया। भवानीपुर की हार ने पिछले विधानसभा चुनाव में बनर्जी की नंदीग्राम सीट पर हार की यादें ताजा कर दीं, जहां शुभेंदु धिकारी ने उन्हें हराया था। वर्ष 2021 में, बनर्जी (71) नंदीग्राम सीट हार गई थीं लेकिन बंगाल में शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि 2026 में वह पनी सीट भी हार गईं ौर उन्हें भाजपा के हाथों सत्ता भी गवानी पड़ी। बनर्जी के लिए ब चुनौती सिर्फ चुनावी वापसी की नहीं, बल्कि संगठनात्मक स्तित्व की भी है। बनर्जी के लिए परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। 71 वर्ष की ायु में, तीन कार्यकाल पूरे करने के बाद, वापसी का रास्ता उनके करियर के किसी भी पिछले पड़ाव से कहीं धिक कठिन प्रतीत होता है। फिर भी, दीदी के नाम से मशहूर ममता बनर्जी की राजनीति का इतिहास प्रतिरोध से ही फलता-फूलता रहा है। सत्ता से बेदखल होने पर, बनर्जी उसी शैली में लौटने का प्रयास कर सकती हैं जिसमें तृणमूल को विपक्षी ताकत में परिवर्तित करना, ौर इसकी राजनीतिक शक्ति को फिर से हासिल करना शामिल है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सोमवार को 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से धिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आकड़ा 148 है। हालांकि, फाल्टा में मतदान रद्द होने के कारण 293 निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती हुई और इस वजह से फिलहाल बहुमत का आंकड़ा 147 है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाई और शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पना जनाधार बढ़ाया। इस जीत के साथ, भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी। निर्वाचन आयोग के ताजा आकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 206 सीटें जीत लीं हैं जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 78 सीट पर जीत दर्ज की है और 3 सीट पर बढ़त बनाये हुए है। वर्ष 2011 में लगभग चार प्रतिशत के मामूली वोट शेयर से, भाजपा 2019 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई और फिर 2021 के विधानसभा चुनावों में 77 सीटें हासिल करके वामपंथी ौर कांग्रेस को पछाड़ते हुए टीएमसी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने शुरू हो गए है। सूबे की 293 सीटों पर किसकी सरकार बनेगी, इस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। बता दें कि बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं लेकिन वोटिंग 293 सीटों पर ही हुई है. राज्य में इस बार दो चरणों- 23 और 29 अप्रैल को मतदान कराया गया था। चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी भाजा के बीच है। साथ ही कांग्रेस-वाम गठबंधन कहीं-कहीं दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। बंगाल में इस बार के चुनाव में रिकॉर्ड मतदान भी देखने को मिला है, इससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. दोनों चरणों में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया, जिसे बंगाल के चुनावी इतिहास में बेहद अहम माना जा रहा है।





