जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। नासा के चंद्रा एक्स-रे स्पेसक्राफ्ट ने गैलेक्सी के केंद्र में बड़ी खोज की है। यह यह रहस्यमय चीज 32 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की भयानक रफ्तार से अंतरिक्ष में भाग रही है। यह दृश्य देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज अंतरिक्ष में तारों के निर्माण और उनके नष्ट होने के बड़े रहस्य से पर्दा उठाउएगी।
ब्रह्मांड का आकार विशाल

हमारी मिलकी वे गैलेक्सी यानी ब्रह्मांड इतना विशाल है कि यहां जितनी भी खोज की जाए उतनी ही काम है। वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसको लेकर तरह-तरह की खोज करते रहते हैं। अब नासा के चंद्रा एक्स-रे स्पेसक्राफ्ट ने हमारी मिलकी वे गैलेक्सी के केंद्र में एक मरे हुए तारे का मलबा खोजा है। यह सुपरनोवा मलबा ब्लैक होल सैजिटेरियस ए के बेहद पास मिला है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तारे को ब्लैकहोल निगल गया था। यह घटना करीब 1700 साल पहले हुई थी। ब्लैकहोल जब इस तारे को निगल रहा था उस दौरान अंतरिक्ष में बड़ी हलचल हुई थी। बता दें कि ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे ताकतवर और रहस्यमयी चीजों में से एक है। जिस ब्लैक होल ने तारे को निगला था वैज्ञानिक उसे किस बड़े ग्रह से 100 ट्रिलियन गुना ताकतवर निकला। साइंस अलर्ट की रिपोर्ट के अनुसार चार साल पहले यानी 2022 में वैज्ञानिकों ने पहली बार इस घटना को रिकॉर्ड किया था। एस्ट्रोनॉमर्स ने एक दूर ब्रह्मांड के सुपरमैसिव ब्लैक होल को एक पूरे तारे को निगलते हुए देखा था। तारा इस ब्लैकहोल के बेहद पास पहुंच गया था। ब्लैक होल की ताकतवर ग्रेविटी ने उसे बाहर नहीं जाने दिया। यह घटना उसी तरह हुई जेसे कोई शिकारी अपने शिकार को पंजे में पकड़ लेता है। इसके बाद इस भयानक ब्लैक होल ने इस तारे को अपना शिकार बना लिया।
तारे के मलबे की खोज
अब जून 2026 में वैज्ञानिकों ने जिस तारे के मलबे की खोज की वह पृथ्वी से करीब 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर मौजूद है। रिसर्च टीम ने इस मलबे को सैजिटेरियस सी नाम दिया है। चंद्रा और एक्सएमएम-न्यूटन स्पेस टेलिस्कोप ने इसे एक्स-रे के एक बड़े ब्लोब के रूप में देखा है। शोध में पाया गया कि इस सुपरनोवा मलबे से निकलने वाले पदार्थ अंतरिक्ष में बहुत तेजी से फैल रहे हैं। यह मटीरियल करीब 32 लाख किलोमीटर प्रति घंटा की हैरान करने वाली रफ्तार से अंतरिक्ष में आगे बढ़ रहा है। यह मलबा आयोनाइज्ड हाइड्रोजन गैस के एक बड़े गुब्बारे के अंदर स्थित है। यह गैस का गोला रेडियो तरंगों का एक बहुत ही चमकीला सोर्स है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह नए तारों के निर्माण का रहस्य खोल सकता है। बता दें कि ऐसे सुपरनोवा अवशेष गैलेक्सी के केमिकल डेवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इनसे निकलने वाले तत्व ही अंतरिक्ष में नई पीढ़ी के तारों और ग्रहों को जन्म देते हैं। जब भारी तारे फटते हैं या कोई ब्लैक होले उन्हें निगल जाता है तो उसके अंदर मौजूद भारी एलिमेंट्स अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। यह मटीरियल धीरे-धीरे इंटरस्टेलर गैस और धूल के बादलों के साथ मिल जाता है। बाद में ये ठंडे और घने बादल अपनी ही ग्रेविटी के कारण ढह जाते हैं। इसी प्रोसेस से नए तारों का जन्म होता है।
जताई गई अनोखी संभावना

वैज्ञानिकों ने इसमें एक और अनोखी संभावना जताई है। ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार विस्फोट से बाहर फेंके गए कुछ मटीरियल को वापस खींच सकते हैं। वेस्लीयन यूनिवर्सिटी के रॉय किलगार्ड ने अनुसार यह कॉस्मिक रीसाइकलिंग का एक बेहतरीन उदाहरण हो सकता है। इस विस्फोट में मलबा वापस उसी आॅब्जेक्ट पर गिरता है जिसे हजारों साल पहले ब्लैकहोल ने निगल लिया था। शोधकर्ताओं के अनुसार यह खोज भविष्य में नए सोलर सिस्टम को भी समझने में मदद करेगी।





