जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। उल्कापिंडों का धरती के पास गुजरना को नई बात नहीं है। अब अमेरिका में जो हुआ वह बेहद हैरान करने वाला मामला है। दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी का दंभ भरने वाली नासा भी इस आफत को पकड़ नहीं सकी। यह उल्कापिंड अमेरिका के उत्तरपूर्वी हिस्से में बड़े धमाके साथ फट गया। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विस्फोट के बाद कई राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
अमेरिका में जोरदार विस्फोट
अमेरिका में जोरदार विस्फोट के बाद आसमान अचानक लाल हो गया। लोग समझे कि दुश्मन देश ईरान ने अमेरिका का हमला बोल दिया है। जब नासा ने इस बात की पुष्टि की कि यह किसी बम का धमाके नहीं बल्कि उल्कापिंड का विस्फोट है तो लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली। बता दें कि इस इस धमाके की आवाज के बाद कई तरह की अटकलें लगने लगीं थी। रिपोर्ट के अनुसार 120000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उल्कापिंड आसमान में फट गया। यह धरती से लगभग 64 किलोमीटर की ऊंचाई पर फटा। नासा के अनुसार यह घटना अमेरिका के उत्तरपूर्वी हिस्से में हुई है। यह धमाका 300 टन टीएनटी के बराबर था। बात दें कि टीएनटी का पूरा नाम ट्रिनिट्रोटोलुइन है। यह अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोटक होता है। इस विस्फोट का असर मैसाचुसेट्स और दक्षिणपूर्वी न्यू हैम्पशायर पर देखा गया।
अचानक तेज आवाज सुनी

लोगों के अनुसार अचानक तेज आवाज सुनी और चौंक पड़े। खिड़कियां हिलने लगीं, पालतू जानवर घबराए गए। कुछ लोगों ने घर में कंपन भी महसूस किया। डब्ल्यूबीजेड-टीवी को बोस्टन से लेकर मैसाचुसेट्स के इप्सविच और रोड आइलैंड के जानस्टन तक के दर्शकों से दर्जनों काल प्राप्त हुए, जिन्होंने इस तेज विस्फोट की आवाज सुनी।
पुलिस विभाग ने जारी किया बयान
वाटरटाउन पुलिस विभाग ने भी इस बारे में बयान जारी किया। पुलिस ने अनुसार उन्हें पूर्वी मैसाचुसेट्स के अलग-अलग हिस्सों से लगातार फोन कॉल मिल रहे थे। लोग पूछ रहे थे कि आखिर यह धमाका किस चीज का था। पुलिस ने कहा कि इसके बारे में जब अन्य रक्षा एजेंसियों से संपर्ककिया गया तो नासा ने बयान जारी कर कहा कि यह किसी बम की नहीं बल्कि खतरनाक उल्कापिंड के फटने की आवाज है। फिलहाल अमेरिका के इन राज्यों में किसी खतरे या नुकसान की सूचना नहीं है। नासा ने साफ किया कि यह किसी सक्रिय उल्का वर्षा का हिस्सा नहीं था।
प्राकृतिक अंतरिक्षीय वस्तु
वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय वस्तु थी। यह न तो कोई अंतरिक्ष मलबा था और न ही पृथ्वी पर गिरता हुआ कोई सैटेलाइट। वैज्ञानिकों के अनुसार रोजाना छोटे उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। इतनी तेज रफ्तार वाले बड़े फायरबॉल कम ही देखने को मिलते हैं। इस बार राहत सिर्फ इतनी रही कि उल्कापिंड जमीन तक पहुंचने से पहले ही 40 मील ऊपर फट गया। अगर इसका बड़ा हिस्सा धरती तक पहुंच जाता, तो भारी तबाही आ सकती थी। बता दें कि पिछले हफ्ते नासा ने कॉमेट 3/एटलस की नई तस्वीरें जारी की थीं। इस उल्कापिंड को 1 जुलाई 2025 में खोजा गया था। उसके बाद से यह लगातार सुर्खियों में बना हुआ था। अब यह तीन चमकदार हिस्सों में फट गया।





