डीआरडीओ ने किया शक्तिशाली मिसाइल का परीक्षण, जल्दी से पकड़ नहीं पाएंगे दुश्मन के रडार 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। मिसाइल दर मिसाइल का परीक्षण कर भारत ने पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया है। पड़ोसी देश यह समझ नहीं पा रहे हैं कि भारत आखिरकार क्या करने वाला है। इस महीने डीआरडीओ ने तीसरी शक्तिशाली मिसाइल का परीक्षण किया है। इस बार जिस मिसाइल का परीक्षण किया वह स्वदेशी लांग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है। यह मिसाइल बेहद सटीकता के साथ वार करती है। इसे दुश्मन देश रडार जल्दी से पकड़ नहीं पाएंगे।


भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए अपनी स्वदेशी ताकत का लोहा मनवाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने ओडिशा के तट पर बड़ा परीक्षण किया है। यह टेस्ट डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया है। इस अत्याधुनिक मिसाइल ने अपने परीक्षण के दौरान सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जिससे भारत की लंबी दूरी तक मार करने वाली मारक क्षमता को एक नई और बेहद घातक धार मिल गई है। इस सफल परीक्षण से भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि मिसाइल के सभी कलपुर्जों ने बेहतरीन काम किया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल परीक्षण के बाद अब भारत लंबी दूरी तक बिल्कुल सटीक निशाना लगा सकता है। उड़ान के दौरान मिसाइल की नई तकनीकों को परखा गया। यह कामयाबी देश की सैन्य ताकत को बहुत मजबूत करेगी।
उद्योगों के सहयोग से बनी मिसाइल

पूरी तरह स्वदेशी मिसाइल को डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों के सहयोग से बनाया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार परीक्षण रेंज द्वारा तैनात किए गए विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों, रडार, इलेक्ट्रो-आप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री ने मिसाइल के उड़ान पथ पर पूरी तरह से नजर रखी। इसके सभी डेटा कैप्चर किए जो पूरी तरह सटीक पाए गए। इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत के लिए एक बहुत बड़ा कदम बताया है। इससे हमारे देश के रक्षा उद्योग को बहुत बढ़ावा मिलेगा। अब रक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम होगी। इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग के गवाह डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भी बने। इससे पता चलता है कि यह मिसाइल आने वाले समय में तीनों सेनाओं की रीढ़ बनने वाली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा सचिव व डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इस बड़ी सफलता के लिए पूरी वैज्ञानिक टीम और औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी। 
निर्भय मिसाइल कार्यक्रम का हिस्सा

यह लांग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भारत के पुराने निर्भय मिसाइल कार्यक्रम का ही एक बेहद आधुनिक और स्वदेशी रूप है। बात दें कि भारत ने साल 2013 में निर्भय मिसाइल का परीक्षण शुरू किया था। इसके बाद डीआरडीओ ने इसमें से विदेशी कलपुर्जे हटाकर पूरी तरह भारत में बना माणिक इंजन और स्वदेशी नेविगेशन तकनीक लगाई। रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी डीएसी ने तीनों सेनाओं के लिए इस मिसाइल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इस मिसाइल के महत्व के बारे में बात करें तो यह एक मल्टी-प्लेटफॉर्म मिसाइल है। इसे भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर तैनात करेगी। इसके अलावा थल सेना और वायुसेना भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी। यह ब्रह्मोस मिसाइल की तरह तेज रफ्तार के सााथ 290 से 500 किलोमीटिर तक मार करने में सक्षमक है। वहीं यह मिसाइल जमीन से बिल्कुल सटकर उड़ती है, जिससे दुश्मन का रडार इसे पकड़ नहीं पाएगा। यह कम खर्च में लंबी दूरी के लक्ष्यों को तबाह करने की भारत को बड़ी क्षमता देती है।