भारत के मिसाइल सिस्टम से दहशत में चीन और पाकिस्तान

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने ऐसे मिसाइल सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी है जो एक साथ 12 लक्ष्यों को भेदता है। रूस का ये घातक हथियार जल्द ही भारत की तरकश में शामिल होगा। इस सौदे के पूरा हो जाने के बाद पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान घुटनों पर आ जाएंगे।
हवाई सुरक्षा क्षमता होगी मजबूत


भारत ने नौसेना की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा रक्षा सौदा किया है। रक्षा मंत्रालय ने कुल 5,083 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी है। जिसमें एएलएच एमके- थर्ड एमआर हेलीकॉप्टर और वर्टिकल लॉन्च श्टिल एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 2,182 करोड़ रुपये का यह सौदा देश की रक्षा प्रणाली को मजबूत करेगा। इसमें सतह से हवा में मार करने वाले भारतीय नौसेना के लिए मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए रूस की कंपनी जेएससी रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के साथ समझौता किया है। इस प्रणाली के शामिल होने से भारत की समुद्री रक्षा क्षमता और मजबूत होगी। पाकिस्तान जैसे नजदीकी दुश्मनों से आने वाले हवाई खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। यह प्रणाली एक साथ 12 लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है।
मध्यम दूरी की नौसैनिक वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली 

श्टिल एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खूबियों के बारे में बात करें तो यह बेहद ताकतवर है। यह एक मध्यम दूरी की नौसैनिक वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है। इसे रूस की अलमाज-आंते कंपनी ने विकसित किया है। यह एक सिंगल-स्टेज ठोस ईंधन आधारित इंटरसेप्टर मिसाइल है। इसके पंख मोड़े जा सकते हैं। इसे विशेषतौर पर नौसैनिक युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसे मुख्य रूप से हल्के युद्धपोतों के लिए डिजाइन किया गया है। इससे समुद्र में जहाजों को हवाई हमलों से सुरक्षित रखा जा सकता है। यह प्रणाली सेमी-एक्टिव रडार होमिंग मिसाइल का उपयोग करती है।
हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम 

इस रक्षा प्रणाली की अन्य विशेषताओं की बात करें तो यह प्रणाली सुपरसोनिक विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइल जैसे हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता अचूक है। ऊंचाई में यह 5 मीटर से लेकर 15 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को भेद सकती है। अपनी तेज प्रतिक्रिया और लगातार फायरिंग क्षमता के लिए जाना जाता है। यह सिस्टम हर 2 से 3 सेकंड में एक मिसाइल दाग सकता है। यह सिस्टम एक साथ 12 अलग-अलग लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखता है। इससे युद्ध या संघर्ष की स्थिति में समुद्र में चल रहे जहाजों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।
प्रणाली को चुनने के पीछे बड़ी वजह 

इस प्रणाली को चुनने के पीछे एक बड़ी वजह इसकी किफायती लागत भी है। विशेषज्ञों के अनुसार बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए ये मिसाइलें सस्ती और सरल हैं। इस प्रणाली में जहाज पर लगे हाई-पावर फायर-कंट्रोल रडार लक्ष्य को टारगेट करते हैं। इससे मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलती है। वहीं इसमें लगा एंटी रडार सिस्टम इजरायल के बराक मिसाइल सिस्टम की तरह काम करते हैं। मिसाइल सिस्टम लगा रेडियो-फ्रीक्वेंसी ट्रांसमीटर आसानी से लक्ष्य की पहचान कर लेता है। इस मिसाइल सिस्टम की तुलना एसएआरएस प्रणाली से भी की जा सकती है। यह तकनीक कम दूरी के लक्ष्यों के लिए अधिक प्रभावी मानी जाती है। जैसे-जैसे लक्ष्य की दूरी बढ़ती है, रडार से परावर्तित सिग्नल अपनी क्षमता बढ़ाता जाता है। इससे लक्ष्य की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लागत, विश्वसनीयता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता के कारण श्टिल-1 जैसी प्रणाली भारतीय नौसेना के लिए अहम साबित हो सकती है।