दवाओं पर चल रहे बड़े खेल का खुलासा, 4,981 रुपये में बिक रही 74 रुपये की दवा

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। यह सुनकर झटका लगेगा कि आपने जिस दवा को 4,981 रुपये में खरीदा है उसका वास्तविक मूल्य महज 74 रुपये 9 पैसे है। जी हां यह हकीकत है यूपी के अस्पतालों की फामेर्सी का यह गंदा खेल सामने आया है। प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ। 
खरीद दर और एमआरपी में अंतर

अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की खरीद दर और पैक पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी के बीच बहुत बड़ा अंतर सामने आया है। यूपीएफएसडीए की छापेमारी में इस घिनौने खेल का खुलासा हुआ है। बता दें कि ड्रग सेफ्टी को लेकर उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी यूपीएफएसडीए द्वारा मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों का निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान, इन फार्मेसियों में उपलब्ध दवाओं की खरीद दर और एमआरपी का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। प्रदेशभर की 214 अस्पताल फार्मेसियों से जुटाए गए आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। जांच में 36 दवाएं ऐसी मिली जिनकी एमआरपी फामेर्सी की खरीद कीमत से 10 गुने से भी कहीं अधिक है। कुछ दवाओं में यह अंतर करीब 67 गुने तक दर्ज किया गया। खास बात यह है कि इनमें गंभीर संक्रमण, आईसीयू और अन्य जटिल चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्टेबल दवाएं भी शामिल हैं।
कई दवाओं में पाया गया अंतर

जांच में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमिक्सिन-बी इंजेक्शन यानी गुफिपोल 500,000 यूनिट की फामेर्सी खरीद दर सिर्फ 74 रुपये 09 दर्ज की गई है। जबकि पैक पर एमआरपी 4,980 रुपये 94 पैसे थी। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 67 गुना थी। इसी दवा के गुफीपोल 5 लाख की खरीद कीमत 90 रुपये और एमआरपी 4,528.10 दर्ज की गई। इस मामले में एमआरपी खरीद दर के मुकाबले करीब 50 गुना अधिक पाई गई। इस तरह एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड/पैक में भी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच उल्लेखनीय अंतर सामने आया है। लिवर की गंभीर बीमारी से जुड़ी दवा टेर्लिप्रेसिन इंजेक्शन टेर्लिटेक 10 एमएल की खरीद कीमत अध्ययन में 56 दर्ज की गई है। जबकि इसकी एमआरपी 3,050 थी। इस तरह एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 54 गुना अधिक रही। इसी दवा के एक अन्य ब्रांड टेरोनिम 10 एमएल की खरीद कीमत 56 और एमआरपी 2,600 दर्ज की गई। यहां खरीद कीमत और एमआरपी के बीच करीब 46 गुने का अंतर पाया गया। दवा-प्रतिरोधी गंभीर संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले शक्तिशाली एंटीबायोटिक भी अध्ययन में शामिल हैं। कोलिस्टिमेथेट सोडियम 4.5 एमआईयू की खरीद कीमत 210 रुपये है। जबकि इसकी एमआरपी 9,702.31 थी। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 46 गुना थी। इसी तरह टाइगेसाइक्लिन इंजेक्शन 50 एमजी की खरीद कीमत 154 रुपेय 54 पैसे के मुकाबले एमआरपी 7,110.47 दर्ज हुई। यहां भी एमआरपी और खरीद दर के बीच करीब 46 गुने का अंतर सामने आया। जांच में सामने आए ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये दवाएं सामान्य ओटीसी दवाओं की श्रेणी की नहीं, बल्कि गंभीर और जटिल संक्रमणों के इलाज में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं।
गंभीर फंगल संक्रमण की दवाओं में खेल

गंभीर फंगल संक्रमण के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कैस्पोफंगिन 70 एमजी के अलग-अलग ब्रांड में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया। एक ब्रांड की खरीद कीमत 800 थी, जबकि उसकी एमआरपी 21,230 दर्ज की गई। यानी एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 26.5 गुना थी। इसी दवा के दूसरे ब्रांड की खरीद कीमत 897.75 और एमआरपी 19,892 दर्ज हुई। इस मामले में एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 22 गुना रही। वहीं महंगी कैंसर और जीवनरक्षक दवाओं में खरीद कीमत और एमआरपी का अनुपात कुछ अन्य इंजेक्शन की तुलना में कम होने के बावजूद प्रति यूनिट रुपये में अंतर काफी बड़ा दर्ज किया गया। उदाहरण के तौर पर बेवाकिजुमैब की खरीद कीमत 7,541.10 थी, जबकि इसकी एमआरपी 69,995 दर्ज की गई। यानी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच 62,453.90 का अंतर सामने आया। इसी तरह इनोन्जा 1 मिलीग्राम 1 एमजी की खरीद कीमत 2,07,504 है। वहीं एमआरपी 3,02,610 रुपये दर्ज की गई।  जांच केवल दवाओं तक सीमित नहीं रहा। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइसेज की खरीद कीमत और एमआरपी के आंकड़े भी देखे गए। एक 3-वे स्टॉप कॉक की खरीद कीमत 6 रुपये 40 पैसे दर्ज की गई, जबकि इसकी एमआरपी 163 थी। इस तरह एमआरपी खरीद कीमत के मुकाबले करीब 25 गुना रही। एक अन्य मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत 20 रुपये 95 पैसे थी, जबकि उसकी एमआरपी 500 दर्ज की गई। यहां भी खरीद कीमत और एमआरपी के बीच करीब 24 गुने का अंतर सामने आया।