अमेरिका-ईरान में शांति समझौता, होर्मुज खोलने पर भी बनी सहमति

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत समेत दुनियाभर के देशों के लिए लिए अच्छी खबर आई है। अमेरिका-ईरान की बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया। इसके साथ ही ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने और अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकाबंदी को भी हटाने की घोषणा कर दी।
ऐतिहासिक समझौते का ऐलान 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध खत्म करने वाले एक ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया। इस बड़ी ईरान डील की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपना 80वां हैप्पी बर्थडे मनाया। इस दौरान उन्होंने अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप केज फाइट का आनंद उठाया। उन्होंने अपने जन्मदिन के जश्न से ठीक दो घंटे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक आफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। मैं इसके लिए सभी को बधाई देता हूं। उन्होंने इस डील को अमेरिका की जीत बताया। वहीं समझौते के बीच ईरान की सेना का एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। ईरान की सेना इस ऐतिहासिक डील को अपनी एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत के रूप में देख रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच ऐसी क्या डील हुई जिसे वे अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं।
28 फरवरी को शुरू हुई जंग 

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई जंग को आज 107 दिन पूरे हो चुके हैं। अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ऐलान किया है कि वह इस समझौते पर साइन करने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शुक्रवार को जिनेवा जाएंगे। जेडी वेंस ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस बेहद अहम और बड़े मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भी जिनेवा पहुंच सकते हैं। इस समझौते में कई अहम बातें सामने आई हैं। समझौते के अनुसार लेबनान सहित सभी क्षेत्रीय मोर्चों पर सैन्य शत्रुता का तत्काल और स्थायी रूप से खात्मा किया जाएगा। ईरान ने किसी भी शांति समझौते को लेबनान के युद्धविराम से मजबूती से जोड़ा था। इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाइयों और विरोध के बावजूद अमेरिका ने ड्राफ्ट में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष विराम की ईरानी शर्त को मानने की बात कही है।
खुलेगा होर्मुज, हटेगी नाकेबंदी

सबसे अहम बात यह है कि होर्मुज से अमेरिका 30 दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा लेगा। यानी 30 दिनों के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। यह जलडमरूमध्य ईरानी नियामक व्यवस्था के तहत संचालित होगा। ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल के बजाय सेवा शुल्क वसूल सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज पर दोनों ही देश झुकते नजर आए। बता दें कि अमेरिका लगातार इस क्षेत्र में टोल या किसी भी शुल्क के खिलाफ था, जबकि ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने पर अड़ गया था। ऐसे में अमेरिका ने उसे एक शुल्क वसूलने की छूट दी है, तो वहीं ईरान ने ज्यादा दर वाला टोल वसूलने के बजाय एक कम दर वाला सेवा शुल्क लेने पर सहमति जताई है।
परमाणु अप्रचार पर होगी बात

इसके अलावा समझौते में 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान विदेशों में जमा ईरान की 24 बिलियन डॉलर की जब्त संपत्ति जारी की जाएगी। साथ ही ईरान के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया जाएगा। इस डील का सबसे अहम पहलू परमाणु कार्यक्रम रहा। इसमें कहा गया है कि अंतिम संधि तक पहुंचने के लिए 60 दिन की बातचीत होगी। ईरान अप्रसार संधि यानी एनपीटी के तहत परमाणु हथियार न बनाने या हासिल न करने का अपना संकल्प दोहराएगा। ईरान को शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम जारी रखने की इजाजत होगी। इसके अलावा, ईरान के मौजूदा संवर्धित यूरेनियम को कम-संवर्धित करके देश से बाहर निकाला जाएगा या नष्ट किया जाएगा। समझौते के अनुसार अमेरिका को ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपने सैन्य बलों को वापस बुलाना होगा। ईरान के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप की बाध्यकारी गारंटी देनी होगी। ड्राफ्ट के अनुसार अंतिम समझौते का दायरा मुख्य रूप से परमाणु मामलों, प्रतिबंधों को हटाने और ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण तक सीमित रहेगा। ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जारी रहेगा।