जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर नई आफत आ रही है। 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाला सौर तूफान आज पृथ्वी से टकराएगा। नासा ने जी3 श्रेणी के मजबूत भू-चुंबकीय तूफान का अलर्ट जारी किया है। इससे उत्तरी भारत, यूरोप और आस्ट्रेलिया के आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी यानी अरोरा दिखने की संभावना है।
नई मुसीबत पर नजरें
दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजरें अंतरिक्ष से आ रही एक नई मुसीबत पर टिकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्ष में एक बहुत बड़ी हलचल हुई है। आज एक भयानक सौर तूफान पृथ्वी से टकरा सकता है। यह कोई ऐसा-वैसा तूफान नहीं है। यह हमारी पृथ्वी को भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है। 1400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है। यह सौर तूफान सोमवार देर रात धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराया। वैज्ञानिकों के अनुसार इसने पृथ्वी के मैग्नेटोस्फेयर पर भारी दबाव पड़ा है। इससे तीव्र भू-चुंबकीय गतिविधि शुरू हो गई। नासा के अनुसार यह घटना दुर्लभ कैनिबल सीएमई यानी कोरोनल मास इजेक्शन के कारण हुई। इसमें सूरज से निकला एक सीएमई दूसरे को ओवरटेक कर एक शक्तिशाली विस्फोट में तब्दील हो गया। यह सूर्य का इस साल का सबसे तेज विस्फोट है। इस धमाके के कारण अंतरिक्ष में चुंबकीय गैस का एक विशाल गुबार पैदा हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा इस घटना को लेकर पूरी तरह अलर्ट पर है। नासा के अनुसार इससे दुनिया भर की पावर ग्रिड, सैटेलाइट्स और संचार प्रणालियों को गंभीर खतरा है।
भू-चुंबकीय तूफान की चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों ने इस खतरे को देखते हुए पृथ्वी के लिए जी3 श्रेणी के मजबूत भू-चुंबकीय तूफान की चेतावनी जारी की है। इस धमाके का सबसे अनोखा असर आसमान में दिखेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तूफान की वजह से उत्तरी भारत के पहाड़ी इलाकों, पूरे यूरोप और आस्ट्रेलिया के आसमान में रंग-बिरंगी आकाशीय रोशनी यानी अरोरा देखने को मिल सकती है। यह पूरी घटना सूर्य के एक खास हिस्से एक्टिव रीजन 4461 से शुरू हुई है। वैज्ञानिकों के अुसार छह जून 2026 की सुबह इस हिस्से में एक जोरदार धमाका हुआ। विज्ञान की भाषा में इसे एम1.8 श्रेणी का सोलर फ्लेयर कहा जाता है। यह एक मध्यम स्तर का सौर विस्फोट है। इस धमाके के साथ ही सूर्य से एक बेहद घना और भारी चुंबकीय फिलामेंट बाहर निकला। आप इस फिलामेंट को बिजली से बने एक तैरते हुए पुल की तरह समझ सकते हैं। इसके भीतर बहुत ठंडी और घनी चुंबकीय गैस भरी होती है। यह फिलामेंट इस समय लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तूफानी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। यह सीधे हमारी पृथ्वी की तरफ आ रहा है। यह जितना भारी और तेज होगा, इसका असर उतना ही ज्यादा होगा।
पृथ्वी पर आया शक्तिशाली सोलर तूफान
बता दें कि इससे पहले 20 जनवरी 2026 की रात भी पृथ्वी पर शक्तिशाली सोलर तूफान आया था। इस तेज सोलर स्टॉर्म के चलते कई दुनियाभर के कई इलाकों में खूबसूरत और दुर्भल आरोरा यानी नॉर्दर्न लाइट्स का नजारा आसमान में देखने को मिला था। वैज्ञानिकों के अनुसार इस घटना के दौरान उन इलाकों में भी रोशनी दिखाई दी थी जहां आमतौर पर यह नहीं दिखती। इस सौर तूफान से सैटेलाइट्स, जीपीएस सिस्टम और अन्य स्पेस-बे्ड टेक्नोलॉजी को कुछ रुकावटें भी हुईं थी। कैलिफोर्निया, ग्रीनलैंड, आस्ट्रिया, जर्मनी इससे प्रभावित हुए थे।
पृथ्वी के पास पहुंचेगा तूफान
नासा के अनुसार आज चुंबकीय बादल जब पृथ्वी के पास पहुंचेगा, तो हमारी सुरक्षा ढाल यानी मैग्नेटोस्फीयर इससे मुकाबला करेगी। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तूफान का असली असर एक खास चुंबकीय दिशा पर निर्भर करेगा। अगर इस तूफान का चुंबकीय रुख दक्षिण की तरफ हुआ, तो यह हमारी सुरक्षा ढाल को कुछ समय के लिए खोल देगा। सुरक्षा ढाल के खुलते ही सूर्य की ऊर्जा सीधे हमारे वायुमंडल में घुस जाएगी। इसके बाद ही आसमान में हरे, बैंगनी और लाल रंग की खूबसूरत रोशनियां चमकेगी। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तूफान इतना मजबूत है कि यह जी3 से बढ़कर जी4 यानी गंभीर श्रेणी का भी हो सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत के उत्तरी हिस्सों में भी रात को आसमान का रंग बदला हुआ दिखेगा।





