जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को खत्म करने का पहली बार संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वह ईरान के खिलाफ मिलिट्री आॅपरेशन समेटने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका लक्ष्य के करीब है। दूसरी ओर ईरान की अदृश्य मिसाइल ने दुनिया में तबाही मचा दी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध पर देखिए खास रिपोर्ट।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने किया पोस्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समेटने पर विचार कर रहे हैं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने के बहुत करीब है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा दूसरे देशों को करनी होगी। ट्रंप की ये टिप्पणियां 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद इस संघर्ष के अंत का सबसे मजबूत संकेत हैं। हालांकि, वैश्विक तेल व्यापार का एक अहम रास्ता होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है। वहीं, हजारों और अमेरिकी मरीन मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ने एक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। जिसके अनुसार अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने एक महीने के लिए विशेष अनुमति देते हुए इन प्रतिबंधों को 19 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह राहत उन तेल खेपों पर लागू होगी, जो शुक्रवार तक जहाजों में लोड की जा चुकी थीं।
लंबा खींचने के मूड में नहीं अमेरिका युद्ध
देखा जाए तो ट्रंप के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने के मूड में नहीं है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। ईरान और इजलरायल के बीच हमले जारी हैं। किसी भी समय हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ते हैं या संघर्ष और गहराता है। ताजा अपडेट के अनुसार ईरान अब हिंद महासागर तक पहुंच गया है। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया, जो कि अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य बेस है, पर दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह जानकारी कई अमेरिकी अधिकारियों ने दी है। इन मिसाइलों में से कोई भी बेस को निशाना नहीं बना सकी। सूत्रों के अनुसार, इन दो मिसाइलों में से एक उड़ान के दौरान विफल हो गई, जबकि अमेरिकी युद्धपोत ने दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए इंटरसेप्टर दागा। अधिकारियों के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइल को रोका गया या नहीं।
दुनिया की बढ़ा दी टेंशन
युद्ध के बीच ईरान की खास मिसाइल ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। इसी मिसाइल से अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने पर हमले हुए। देखा जाए तो ईरान की ताकत का अमेरिका आकलन नहीं कर पाया। अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर ईरान ने मिसाइल हमला कर अपनी ताकत का संकेत दिया है। यह हमला इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि यह बेस ईरान से करीब 4000 किलोमीटर दूर है, जो उसकी घोषित मिसाइल रेंज से कहीं ज्यादा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि उनकी बैलिस्टिक मिसाइलों की अधिकतम रेंज करीब 2000 किलोमीटर है। लेकिन, डिएगो गार्सिया पर हमला इस दावे को चुनौती देता है। यह दूरी करीब 4000 किलोमीटर है, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास घोषित से कहीं ज्यादा लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता हो सकती है।
ईरान के पास अभी ज्यादातर छोटी दूरी की मिसाइलें
इजरायल के अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अभी ज्यादातर छोटी दूरी की मिसाइलें हैं। ये 1000 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। कुछ मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं। इनकी रेंज 3000 किलोमीटर तक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बता दें कि डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है। यहां से अमेरिका अपने बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल जहाज तैनात करता है। यह बेस एशिया और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य रणनीति का एक मजबूत केंद्र है। ऐसे में इस पर हमला होने की कोशिश को बेहद गंभीर माना जा रहा है।





