भारत में दौड़ेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत रेलखंड से होगी संचालित

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया भर में चल रहे तेल संकट के बीच भारत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। मोदी सरकार ने देश की पहली हाइड्रोजन डेमू ट्रेन को मंजूरी दे दी है। यह हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड से चलेगी। यह 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित डेमू ट्रेन होगी। हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने देश की पहली हाइड्रोजन डेमू ट्रेन की सौगात मिलने पर पीएम मोदी और केंद्र सरकार का आभार प्रकट किया है।
अब न डीजल जलेगा और नहीं बिजली फुंकेगी

अब न डीजल जलेगा और नहीं बिजली फुंकेगी। भारतीय रेलवे ने हरित क्रांति की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। यह कदम बता रहा है कि भारत अब आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ विज्ञान, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा है। बता दें कि एक समय था जब रेलवे भारी मात्रा में डीजल इंजन का प्रयोग करता था। उसके बाद इलेक्ट्रिक इंजन ने इसकी जगह ले ली। अब इस तकनीक से दो कदम आगे बढ़ते नए युग की शुरुआत कर दी है। यह भारतीय रेलवे के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन शुरू होने जा रही है। भारतीय रेलवे द्वारा स्वीकृत यह 10 कोच वाली अत्याधुनिक ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाले इंजन से संचालित होगी। इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। सीएम सैनी ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा परियोजनाओं की दिशा में बड़ा योगदान देगी। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ट्रेन पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली इस ट्रेन से केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होगा। इस ट्रेन की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। पेट्रोल और डीजल आधारित परिवहन व्यवस्था ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। ऐसे समय में भारत द्वारा हाइड्रोजन ऊर्जा आधारित रेल सेवा की शुरूआत एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन

रेलवे बोर्ड ने हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रेन के संचालन से पहले सभी सुरक्षा मानक पूरे किए जाएंगे। जींद में हाइड्रोजन गैस भरने और स्टोर करने की सुविधा के लिए लाइसेंस जारी किया जा चुका है। इसके अलावा हाइड्रोजन प्लांट, ट्रेन सेट और बैटरी सिस्टम से जुड़ी सुरक्षा जांच रिपोर्ट में बताई गई सभी शर्तों को पूरा करना होगा। रेलवे ने हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन और ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है। कर्मचारियों की क्षमता का प्रमाणन किया जाएगा। शुरुआती तीन महीनों तक ट्रेन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ मौजूद रहेगा, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके। सुरक्षा को लेकर रेलवे बोर्ड ने कई अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं। इनमें हाइड्रोजन प्लांट की 24 घंटे निगरानी, सेंसर की नियमित सफाई, जरूरी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और पूरे परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। रेलवे ने भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के निर्देश भी दिए हैं।