जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। हिजाब विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार प्रयागराज के एक प्राइवेट स्कूल की छात्रा ने हिजाब पहनकर पढ़ाई करने की इजाजत मांगी। इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद समेत कई नेता और इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिजाब के समर्थन में उतर आए हैं।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की कक्षा 11वीं की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने साफ कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक हिस्सा नहीं है। अदालत ने दोहराया कि केवल दावे के आधार पर अनुच्छेद 25 के तहत राहत नहीं दी जा सकती। कोई धार्मिक ग्रंथ, साक्ष्य या ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया था, जिससे यह साबित हो कि हिजाब न पहनने से आस्था प्रभावित होती है। इस मामले को देखा जाए तो पता चलता है कि हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ताजा फैसला केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि हिजाब पहना जा सकता है या नहीं? असली सवाल है कि क्या किसी छात्रा को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत यूनिफॉर्म से अलग हिजाब पहनने का अधिकार इसलिए मिल सकता है क्योंकि वह इसे अपने मजहब की अनिवार्य धार्मिक प्रथा बताती है। इस सवाल का जवाब देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इस दावे को स्थापित करने के लिए पर्याप्त तथ्य और प्रामाणिक सामग्री भी चाहिए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही छात्रा निचली कक्षाओं में बिना किसी रोक-टोक के स्कार्फ पहनती रही हो, लेकिन इससे उसे स्कूल की यूनिफॉर्म नीति में बदलाव की मांग करने का अधिकार नहीं है। देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन, समानता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर एक तरह से कोर्ट की मुहर है।
हाईकोर्ट के फैसले को बनाया आधार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को आधार बनाया। बता दें कि 31 दिसंबर 2021 को कर्नाटक के उडुपी जिले के एक सरकारी कॉलेज में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कक्षाओं में प्रवेश से रोक दिया गया। फरवरी 2022 में यह विवाद पूरे राज्य में फैल गया। जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफॉर्म को अनिवार्य करने का आदेश जारी किया। मार्च 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिजाब पहनना इस्लाम में जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है। अदालत ने यूनिफॉर्म के नियमों को सही ठहराया। इसके बाद यह माला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता सलमान खुर्शीद ने इस पर अपनी राय व्यक्त की। खुर्शीद ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला उचित नहीं है। हम इसे एक बड़े बेंच में ले जाएंगे। मैं नहीं समझता हूं कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का जो फैसला आया है वो बहुत प्रभावी होगा। आगे जो फैसला होगा वो सुप्रीम कोर्ट का होगा। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश की कड़ी आलोचना की। दारुस्सलाम स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले को इस्लाम पर हमला बताया। मैं हाई कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हूं। उन्होंने कहा कि आज का फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन है। आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि इस्लाम के लिए क्या जरूरी है? लड़कियां हिजाब अपने सिर पर पहनती हैं, दिमाग पर नहीं। यह इस्लाम पर हमला है। ओवैसी ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित सबरीमाला मामले का हवाला देते हुए धार्मिक प्रथाओं की अनिवार्यता तय करने के सवाल पर भी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि जब सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ इस व्यापक संवैधानिक प्रश्न पर विचार कर रही है, तब किसी धार्मिक प्रथा को लेकर ऐसा फैसला नहीं दिया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट के इस फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में भ्रम की स्थिति है। महली के अनुसार कुरान और हदीस दोनों में हिजाब का साफ जिक्र है। दुनियाभर में मुस्लिम महिलाएं इसे पहनती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के बुनियादी नियमों का पालन करने की आजादी देता है। बोर्ड का कहना है कि छात्र-छात्राओं को स्कूल के ड्रेस कोड का पालन जरूर करना चाहिए। वहीं अगर कोई लड़की अपनी धार्मिक जिम्मेदारी भी निभाना चाहती है, तो इसका रास्ता निकाला जाना चाहिए। इसी आधार पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अब हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
मायावती ने भी दिया बयान
बसपा प्रमुख मायावती ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए सेक्युलर संविधान के तहत सभी को धार्मिक मान्यताओं का अधिकार है। स्कूल में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब के मामलों को कोर्ट-कचहरी में घसीटने के बजाय लोकल स्तर पर स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन की आपसी सूझबूझ से सुलझाने पर जोर दिया है। मायावती ने कहा कि महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और पर्दे के जरिए आत्म-सम्मान की रक्षा जैसे मामलों को संवेदनशीलता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी से संवेदनशील मामलों पर टिप्पणी से बचने की अपील की।




