भारत अब चीन पर कसेगा नकेल, 4 देशों को जोड़ेगा 1300 किमी. हाइवे

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट सीपीईसी की काट के लिए भारत ने भी बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसके तहत भारत 1300 किलोमीटर लंबा हाईवे बनाएगा। यह 4 देशों को आपस में जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद चिकन नेक के जरिए भारत को घेरने का सपना देख रहा बांग्लादेश अब झुनझुना बजाएगा।
भारत की घेरेबंदी करने में जुटा चीन

चीन सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिये भारत की घेरेबंदी करने में जुटा है। बीजिंग इस प्रोजेक्ट में अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। वहीं अब भारत ने आर्थिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इंडिया-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे को फिर से रफ्तार देना शुरू कर दिया है। म्यांमार के राष्ट्रपपति की भारत यात्रा ने वर्षों से बंद पड़े इस प्रोजेक्ट को फिर से रास्ते पर ला दिया है। इसके तहत भारत थाईलैंड तक रोड बनाएगा। बता दें कि जब म्यांमार के राष्ट्रपति भारत दौरे पर आए तो उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर पूरी बात की। इसका नाम इंडिया म्यांमार थाइलैंड हाईवे रखा गया है। इसे कोलकाता-बैंकॉक एक्सप्रेसवे भी कहते हैं। रूट प्लान की बात करें तो यह कोलकाता के बाद मणिपुर और मणिपुर से म्यांमार तक जाएगा। इसके बाद वहां से थाईलैंड पहुंचा जा सकता है।
1,360 किलोमीटर लंबा रास्ता

रणनीतिक जानकारों के अनुसार यह कोई साधारण सड़क नहीं है। यह 1,360 किलोमीटर ऐसा लंबा रास्ता है जो मणिपुर के मोरेह से शुरू होकर म्यांमार के जंगलों और पहाड़ों से गुजरता हुआ थाईलैंड के माए सोट तक जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि यह थाईलैंड में भी रुकने वाला नहीं है। प्लान के अनुसार यह कंबोडिया, फिर लाओस और आगे वियतनाम तक जाएगा। बता दें कि भारत ने 2003-04 में इसकी योजना बनाई। 2004 में ही तीनों देशों ने मिलकर इसे बनाने पर सहमति जता दी थी। भारत ने म्यांमार में सड़क के हिस्से के लिए 1,177 करोड़ रुपये भी दिए थे। भारत और थाईलैंड ने अपने-अपने हिस्से के काम पूरे कर लिए। अब केवल म्यांमार में पेच फंसा हुआ था। वहां 2021 में सेना ने सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद चिन और सागाइंग जैसे इलाकों में लड़ाई छिड़ गई। इससे वहां के अलग-अलग गुटों में संघर्ष के कारण काम रुक गया था। भारत दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति ने इस को फास्ट ट्रैक पर रखने का वादा किया है। अब ये अनुमान है कि इसे 2027-28 तक पूरा कर लिया जाएगा। रणनीतिक जानकारों के अनुसार यह कोई छोटा-मोटा प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि यह तीन देशों का ऐसा बड़ा दांव है जिससे इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल जाएगी।
व्यापार को बढ़ाने का मौका मान रहा थाईलैंड

थाईलैंड इस सड़क को अपने व्यापार को बढ़ाने का मौका मान रहा है। इससे उसे पूर्वी भारत के बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा। इसी तरह म्यांमार भी भारत के साथ व्यापार बढ़ाने को लेकर उत्साहित है। इस सड़क प्रोजेक्ट में जापान भी हमारा साथ दे रहा है। जापान म्यांमार में पुल और रेल के प्रोजेक्ट बनाने में मदद कर रहा है। जापान का मकसद चीन के प्रभाव को कम करना है। अगर बांग्लादेश की बात करें तो शेख हसीना के समय वह भी इस प्रोजेक्ट में शामिल होना चाहता था। हसीना सरकार ढाका और त्रिपुरा के रास्ते भारत से व्यापार बढ़ना चाहती थी। मुहम्मद युनुस के आने बाद हालत खराब हो गए। बांग्लादेश इस गुमान में आ गया कि चिकेन नेक को चीन के साथ मिलकर वह बंद कर देगा, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के संवेदनशील इलाके की करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को मिल गई है। इस जमीन का इस्तेमाल सीमा सुरक्षा, फेंसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाएगा।