इंडियन स्टेरलाइजेशन हैल्थकेयर एसोसिएशन द्वारा 11वां क्षेत्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित, 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल के सभागार में रविवार को इंडियन स्टेरलाइजेशन हैल्थकेयर एसोसिएशन द्वारा 11वां क्षेत्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता कैलाश हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट के कैप्टन बब्बन राय ने की। सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने भाग लेकर स्टेरिलाइजेशन हेल्थकेयर एवं सेंट्रल स्टेराइल सर्विसेज विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों और प्रगति पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में उत्तर भारत के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर शिव लाल शर्मा ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ महेश शर्मा द्वारा किया गया। साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ विजय अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में कैप्टन बबन राय ने बताया कि वर्तमान में CSSD कार्यों को ओटी /एनेस्थीसिया टेक्नीशियन के अंतर्गत रखा गया है, जबकि CSSD टेक्नोलॉजिस्ट की शिक्षा, कौशल और कार्यक्षेत्र पूर्णतः अलग एवं विशिष्ट है। CSSD प्रोफेशनल्स विभिन्न वैज्ञानिक प्रक्रियाओं जैसे स्टीम, प्लाज्मा, ETO, LTSF एवं ओजोन के माध्यम से उपकरणों, इम्प्लांट्स एवं चिकित्सा सामग्री का सुरक्षित पुनर्प्रसंस्करण सुनिश्चित करते हैं जो रोगी सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 ISHA ने एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन कमीशन से CSSD टेक्नोलॉजिस्ट को अलग से मान्यता प्रदान हुए उन्हें Allied Healthcare Professions में शामिल करने की मांग की। सम्मेलन में Single Use Devices के पुनः उपयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ISHA ने बताया कि इन उपकरणों की अधिक लागत के कारण आम मरीजों की पहुंच सीमित हो जाती है। 

वर्तमान में इनके पुनः उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन व्यवहार में अधिकांश अस्पतालों में इनका उपयोग किया जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया कि सभी हितधारकों से परामर्श कर एक सुसंगत कानूनी ढांचा तैयार किया जाए जिसके अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त CSSD या थर्ड पार्टी रीप्रोसेसर द्वारा SUDs का सुरक्षित पुनःप्रसंस्करण किया जा सके जिससे सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए उपचार की लागत कम की जा सके।