जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। कांग्रेस अपने विधायकों के क्रॉस वोटिंग से काफी परेशान है।
बिहार के बाद हरियाणा में क्रॉस वोटिंग के चलते मेवात की राजनीति काफी गरमा गई है। कांग्रेस के दो विधायकों के नाम सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गरम है। आलम यह है कि गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक इस मामले में बहस शुरू हो गई है। वहीं भाजपा इसे अपने विस्तार के रूप में देख रही है।
इन पांच विधायकों पर लगा है आरोप
बता दें कि कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया है। इनमें जिला पलवल की हथीन सीट से विधायक इसरारूल और जिला नूंह की पुनहाना सीट से विधायक इल्यास शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि इन विधायकों ने आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय दूसरे प्रत्याशी को वोट दिया। इसके लेकर पार्टी ने सभी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं इसरारूल ने साफ कर दिया है कि उन्होंने अपनी मर्जी से वोट दिया है, यह उनका मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि आगे का फैसला जनता की राय के अनुसार होगा।

अटकलों का बाजार गर्म
बता दें कि विधायक इल्यास की गतिविधियों ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को कई लोग नए राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चाएं तो यहां तक हैंकि वह अपने बेटे को राजनीति में उतारने की योजना पर काम कर रहे हैं। सायद यही वजह है कि वह सत्तापक्ष से ज्यादा नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।
बात अगर राजनीतिक विश्लेषकों की करें तो भाजपा मेवात क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। क्रॉस वोटिंग को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं कांग्रेस विधायकों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा लंबे समय से इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ की कोशिश कर रही है। भाजपा को इसके सापेक्ष संकेत भी दिखाईदे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग का मामला अब राहुल गांधी तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा के सभी विधायकों को दिल्ली तलब किया है। यहां इस पर न सिर्फ चर्चा होगी बल्कि कोई कार्रवाई किए जाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप
बता दें पार्टी आलाकमान क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी कर सकती है। इन विधायकों से पार्टी इस्तीफा भी मांग सकती है। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में उपचुनाव की स्थिति बन जाएगी।





