जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की है। उन्होंने कोरोना काल के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का भी जिक्र कर सबको चौंका दिया। इसके अलावा उन्होंने एक साल तक सोना न खरीदने और विदेश यात्राएं न करने की अपील की। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दुनिया को कुछ बड़ा होने वाला है।
मिडिल ईस्ट में जारी जंग
पीएम मोदी ने दो दिन पहले देश से बड़ी अपील की थी। जिसमें उन्होंने देशवासियों से कोरोना के समय जो रूटीन अपनाया गया था, उसी पर जोर देने को कहा। इसके अलावा उन्होंने कई अहम बातें कही। माना जा रहा है कि यह सारी बातें मिडिल ईस्ट में जारी जंग के असर को लेकर की गई थी।
अब इसको लेकर कई अन्य कारण भी सामने आए हैं। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम होने वाला नहीं है। वहीं पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया की कमर पहले ही तोड़ दी है। आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। इस बीच ईरान ने कहा है कि भारत समेत अन्य देशों की दुर्दशा के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सारा ठीकरा अमेरिका और इस्राइल पर फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान इस स्थिति से खुश नहीं है, लेकिन यह जंग उन पर थोपी गई है।
डोनाल्ड ट्रम्प का दावा
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के कट्टरपंथी नेता आखिरकार झुक जाएंगे। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि वे ईरान के साथ तब तक सख्ती से पेश आते रहेंगे, जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता। जब उनसे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि मैं उनसे तब तक निपटूंगा, जब तक वे समझौता नहीं कर लेते। इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा था कि ईरान क्षेत्रीय तनाव से निपटने के लिए कई रास्तों पर विचार कर रहा है। इनमें सम्मान और मजबूती के साथ बातचीत भी शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कई बड़े विवादित मुद्दों में उलझी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट, ईरानी जहाजों की अमेरिकी नाकेबंदी, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा आयल
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने की आशंका से बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इरान पर शिंकंजा कसने के लिए अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी और कड़ी कर दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ईरानी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कड़ी नजर रखें। अमेरिका का आरोप है कि ईरान शेल कंपनियों और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तेल की तस्करी कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को देखेंगे तो समझ आएगा कि युद्ध के जल्द रुकने के आसार नहीं है। ऐसे में पीएम मोदी की अपील बता रही है कि दुनिया में बहुत बड़ा होने वाला है। बता दें कि पीएम मोदी ने अगले एक साल तक शादियों के लिए सोना ना खरीदने की अपील भी जनता से की थी। उन्होंने कहा था कि दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल महंगे हो चुके हैं। ईंधन की बचत करना बेहद ही जरूरी हो गया है। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े सप्लाई चेन संकट से जूझ रही है। रूस और यूक्रेन युद्ध ने भी वैश्विक स्तर पर कठिनाइयों को बढ़ा दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 5 से 6 सालों से हमारी सरकार इस संकट से निपटने की कोशिश कर रही है। आज फर्टिलाइजर की बोरी तीन हजार रुपए की बिक रही है। वहीं भारत में वही बोरी किसानों को 300 रुपए में मुहैया कराई जा रही है। प्रधानमंत्री का मैसेज क्लियर था कि अब फ्यूल को बचाना केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की आर्थिक मजबूती से भी जुड़ चुका है। बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और तेल संकट के बीच सरकार चाहती है कि देश में ईंधन की खपत कम हो ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सके। पीएम मोदी ने कोरोना काल की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय भारत में पहली बार बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम का इस्तेमाल हुआ था। आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई दूसरी कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी थी। पीएम मोदी ने खाने के तेल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके आयात के लिए भी बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हर खाने में तेल का उपयोग में कुछ कमी करे तो वो भी देशभक्ति का काम है। पीएम मोदी के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ताजा आंकड़ों ने भी हड़कंप मचा दिया है। पुरी ने खुलासा किया है कि सरकारी तेल कंपनियां इस समय रोज 1,000 करोड़ का भारी नुकसान सह रही हैं। इस तिमाही में तेल कंपनियों का कुल घाटा 1,00,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि पर्दे के पीछे कुछ बहुत बड़ा हो रहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने भी पीएम मोदी की इस अपील को आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरी बताया।
अश्विनी वैष्णव ने किया दावा
वहीं केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के जल्द थमने के आसार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम बहुत अनिश्चितता वाले समय में हैं। हमारी किसी गलती के बगैर, हमारे पड़ोस में दो देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पीएम मोदी के सोना न खरीदेने वाले बयान को देखेंगे तो इसके पीछे भी यही कारण है। आर्थिक जानकारों की मानें तो सोना न खरीदने के पीछे पीएम मोदी का क्राइसिस मैनेजमेंट वाला लॉन्ग टर्म प्लान है। बता दें कि जब हम बाहर से कोई सामान मंगवाते हैं, तो हमें उसका भुगतान डॉलर में करना होता है। युद्ध की वजह से डॉलर महंगा हो रहा है और रुपया गिर रहा है। पीएम मोदी चाहते हैं कि हम अपनी उन जरूरतों को कम करें जो बहुत जरूरी नहीं हैं। इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे और देश की आर्थिक सेहत बिगड़ने न पाए।





