जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। अमेरिका, इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए बेहद अच्छी खबर आई है। भारत को आंध्र प्रदेश में काफी बड़ा सोने का भंडार मिला है। जानकारों के अनुसार अगले महीने से यहां उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके बाद देश में अरबों डॉलर की कमाई आएगी।
आर्कषण का केंद्र रहा सोना
सोना यानी पीली धातु सदियों से भारत के लोगों को आर्कर्षित करता रहा है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत स्वर्ण उपभोक्ता देशों की सूची में काफी अहम स्थान रखता है। रिपोर्ट के अुनसार भारत की असली ताकत लोगों के घरों में है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 25,000 से 27,000 टन सोना जमा है। यह आंकड़े गवाह हैं कि सोने के प्रति भारतीयों में कितनी ज्यादा दीवानगी है। देश की सरकार अन्य क्षेत्रों की तरह स्वर्ण भंडार सेक्टर में भी आत्मनिर्भरता चाहती है। कई सालों से ऐसे प्रयास हो रहे हैं। इसमें सफलता भी मिली है। इसी कड़ी में अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन मई में शुरू होने वाली है। बता दें कि जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान है। इस पूरे प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।
मई महीने में शुरुआत
रिपोर्टस के अनुसार इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। वर्तमान में यहां प्री-कमर्शियल आपरेशंस चल रहे है। जानकारों का कहना है कि आंध्र सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू से महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर सकते हैं। खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीना ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया। यह भारत की आयातित सोने पर निर्भरता में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। सालों से भारत आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर रहा है। हर साल वह 800 टन से ज्यादा सोना मंगाता रहा है। बता दें यह ऐसा खर्च है जिसका बोझ देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, क्योंक पूरा भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है। साल 2000 में कोलार गोल्ड फील्ड्स के बंद होने से बड़े पैमाने पर माइनिंग में एक गहरा खालीपन आ गया था। जबकि, सरकारी कंपनियां ज्यादातर विदेश में प्रोजेक्ट्स पर ही ध्यान देती रही हैं। जियोमाइसोर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से विकसित जोन्नागिरी प्रोजेक्ट घरेलू उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करके इस स्थिति को बदलना शुरू कर सकता है। जोन्नागिरी, एरार्गुडी और पागिडीराय गांवों में लगभग 598 हेक्टेयर में यह प्रोजेक्ट फैला है। यह 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आकर्षित कर चुका है। आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की ओर से इस खदान को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है।
42.5 टन तक पहुंच सकता उत्पादन
शुरुआती अनुमानों के अनुसार यहां 13.1 टन सोने का प्रमाणित भंडार है। खोजबीन से पता चलता है कि यह बढ़कर 42.5 टन तक पहुंच सकता है। पूरी क्षमता से काम करने पर इस खदान से अगले 15 सालों तक हर साल 1,000 किलोग्राम तक शुद्ध सोना निकलने का अनुमान है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इससे भारत के माइनिंग सेक्टर में और भी ज्यादा निवेश आकर्षित हो सकता है। भारत को अगले दस सालों में हर साल कम से कम 50 से 100 टन सोना पैदा करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इस प्रोजेक्ट में स्थानीय इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए भी कई पहलें शामिल हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, साफ-सफाई, पीने का पानी और कौशल विकास शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट को औद्योगिक प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने और मंजूरी दिलाने में सरकारी मदद ने अहम भूमिका निभाई है।
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