जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अमेरिका की एनओएए एजेंसी ने एल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा की है। एजेंसी ने देखा कि प्रशांत महासागर से विनाश की लहरेंउठ रही हैं। इसको लेकर दुनिया भर में मौसम बदलने की चेतावनी जारी की गई है। भारत पर इसका डबल अटैक होने वाला है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पांच लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।
फोन पर बजा खराब मौसम का अलर्ट
भारत में कल शाम और रात 3 बजे तक लोगों के फोन पर खराब मौसम का अलर्ट बजने लगा। इस दौरान लोगों को बिजली गिरने, भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई। साथ ही लोगों को 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हवाएं चलने के प्रति सचेत किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सब अचानक नहीं हुआ है बल्कि पूरी दुनिया के साथ भारत में एलनीनो की शुरुआत होने का संकेत है। अमेरिका के एनओएए जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने कल यानी बृहस्पतिवार की सुबह आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा कर दी। एजेंसी के अनुसार एल नीनो की स्थिति आधिकारिक रूप से विकसित हो चुकी है। आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जलवायु घटना 2023-24 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकती है।
प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है एल नीनो
बता दें कि एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है। यह तब बनता है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह घटना आमतौर पर हर 2 से 7 वर्ष में होती है और दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करती है। एनओएए के जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो का प्रभाव इसकी तीव्रता पर निर्भर करेगा। यह कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का जोखिम बढ़ा सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखा और गर्मी की लहरें ला सकता है। जलवायु परिवर्तन इन प्रभावों को और बढ़ा या बदल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो की शुरुआत भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली पश्चिमी हवाओं से होती है। ये हवाएं समुद्र की सतह के गर्म पानी को पूर्व की ओर धकेलती हैं, जिससे पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में गर्म पानी का एक बड़ा क्षेत्र बन जाता है। यह गर्म पानी उसके ऊपर की हवा को भी गर्म करता है, जिससे हवा ऊपर उठती है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक वायुमंडल में मौसम प्रणालियों का पुनर्गठन शुरू हो जाता है और दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि रिकॉर्ड में दर्ज घटनाओं में से अब तक का सबसे शक्तिशाली एल नीनो हो सकता है। दुनियाभर के देशों में इसका व्यापक असर दिखाई देगा। वहीं भारत पर इसका डबल अटैक होने वाला है।
महंगाई के साथ अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती
बता दें कि पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती महंगाई आम आदमी के साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौती बनती जा रही है। एक रिपोर्ट में आशंका जताई है कि महंगाई और मानसून पर अल-नीनो का पड़ने वाला प्रभाव 2027 की दूसरी तिमाही से उपभोक्ता मांग की रफ्तार को धीमी कर सकते हैं। जिससे भारत पर पांच लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला और महंगे क्रूड के कारण पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, एफएमसीजी, डेयरी, केमिकल, ड्यूरेबल्स एवं वाहन क्षेत्र में उत्पादों के दाम बढ़े हैं, जिससे खपत मांग में गिरावट की आशंका है। इसके अलावा, उर्वरक, खाद्य एवं ईंधन सब्सिडी में काफी बढ़ोतरी होगी और पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी से होने वाली कमाई घटेगी। इन कारकों की वजह से अर्थव्यवस्था पर 4 से 5 लाख करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार 2027 की दूसरी छमाही से रेपो दर में बढ़ोतरी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सेवाओं सहित व्यापार का संतुलन ठीक-ठाक है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, विदेश से आने वाली कमाई यानी रेमिटेंस पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसके कारण बनेंगे।





