पृथ्वी पर आ रहा बड़ा संकट, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। एस्टेरॉयड को लेकर वैज्ञानिकों ने अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी जारी की है। नासा के वैज्ञानिकों ने सबसे पहले 40,000 नियर अर्थ एस्टेरॉयड की पहचान की। इसके बाद इनका अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से करीब 2,000 चट्टानें पृथ्वी से टकराकर सर्वनाश कर सकती हैं।
नियर अर्थ एस्टेरॉयड पर दावा

हमारी पृथ्वी के करीब से हमेशा नियर अर्थ एस्टेरॉयड गुजरते रहते हैं। कई बार इनको लेकर वैज्ञानिक चेतावनी जारी करते हैं। इससे दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं। बता दें कि कोई भी ऐसा क्षुद्रग्रह या धूमकेतु जिसका परिक्रमा पथ सूर्य के करीब यानी पृथ्वी-सूर्य की दूरी का लगभग 1.3 गुना या उससे कम होता है उसे नियर अर्थ आॅब्जेक्ट कहा जाता है। इनमें से अधिकांश एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति के बीच मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट में पाए जाते हैं। वहीं गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से कुछ एस्टेरॉयड अपनी कक्षा बदलकर पृथ्वी के पास आ जाते हैं। इन्हीं एस्टेरॉयड से पÞृथ्वी और जीवन को सबसे बड़ा खतरा पैदा होता है।
धरती पर बड़ी तबाही का अंदेशा 

अब खगोल वैज्ञानिकों ने एस्टेरॉयड से धरती पर एक बड़ी तबाही का अंदेशा जताया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के करीब 40,000 क्षुद्रग्रहों की पहचान की गई है। इन पर लगातार निगरानी की गई तो बेहद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। इनमें से लगभग 2000 ऐसे एस्टेरॉयड पाए गए जो अपनी कक्षा को बदलकर पृथ्वी के करीब आ रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार ये धरती का विनाश कर सकते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि पृथ्वी के करीब मौजूद क्षुद्रग्रह कुछ फीट से लेकर कई मील चौड़े हो सकते हैं। ये क्षुद्रग्रह चार अरब साल से भी पहले से हमारे सौर मंडल का हिस्सा हैं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मैनेजर लुका कॉन्वर्सी का कहना है कि क्षुद्रग्रहों पर अभी शोध चल रहा है। इनकी संख्या बढ़ सकती है। सदी की शुरुआत में यह संख्या एक हजार थी, जो 2016 में 15,000 और 2022 में 30,000 हो गई। अब इनकी संख्या 40,000 से ज्यादा हो चुकी है। पुरानी खोज की बात करें तों सबसे पहले पृथ्वी के नजदीक खोेजे गए क्षुद्रग्रह एस्टेरॉयड 433 इरोस था। जिसे 1898 में बर्लिन की यूरानिया वेधशाला में जर्मन खगोलशास्त्री कार्ल गुस्ताव विट ने खोजा था। लाइव ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह 20 मील चौड़ा और सात मील गहरा है। अभी पृथ्वी से 18 करोड़ मील दूर तुला राशि यानी लिब्रा कॉन्स्टेलेशन में है। अध्ययनों से पता चलता है कि गुरुत्वाकर्षण इसे एक से दो मिलियन वर्षों में पृथ्वी को पार करने वाली कक्षा में धकेल सकता है। इसकी खोज के बाद से विशेषज्ञों ने हजारों नए क्षुद्रग्रहों की पहचान की है। जैसे-जैसे वैज्ञानिक अंतरिक्ष में मौजूद इन नजदीकी चट्टानों का पता लगाते हैं और इनके बारे में और जानकारी हासिल करते हैं। हमें अंतरिक्ष से हमारे ग्रह को होने वाले संभावित खतरों और खुद को सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में बेहतर समझ मिलती है।
क्षुद्रग्रहों की हो चुकी है खोज

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें भरोसा है कि ज्यादातर बड़े क्षुद्रग्रहों की खोज हो चुकी है और उन पर नजर रखी जा रही है। अब वे मध्यम आकार के क्षुद्रग्रहों (300 से 900 फीट के बीच) की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इन्हें खोजना मुश्किल होता है, लेकिन ये क्षेत्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। मौजूदा अनुमानों से पता चलता है कि इनमें से केवल 30 प्रतिशत का ही पता लगाया जा सका है। यह खोज लगातार जारी रहेगी। नासा में सेंटर फॉर नियर-अर्थ आॅब्जेक्ट स्टडीज के निदेशक पॉल ने कहा कि छोटे एस्टेरॉयड को पृथ्वी के काफी करीब आते देखना अच्छा लगता है। हम पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को नाटकीय रूप से मोड़ते हुए देख सकते हैं।