धरती के नीचे से बड़ी तबाही , ग्लाबल वार्मिंग पर अब तक की सबसे खतरनाक रिपोर्ट

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ग्लाबल वार्मिंग को लेकर अब तक की सबसे खतरनाक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार धरती के नीचे से बड़ी तबाही आ रही है। इसका असर अभी से पूरी दुनिया में दिखाई दिया। यूरोप में इतनी भयंकर गर्मी पड़ी की लगभग 10000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई।
ग्लोबल वार्मिंग को लेकर रिसर्च

 

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चार दशक से हो रही लंबी रिसर्च का पूरा अध्ययन किया। वैज्ञानिकों के अनुसार यदि इंसान अपनी आदतों में बदलाव नहीं करता तो आने वाला समय काफी तबाही वाला होगा। शोध में एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पुराने सभी मिथकों को ध्वस्त कर दिया। अब तक हुए शोध में माना जाता था कि जंगलों की मिट्टी में मौजूद गहराई वाले स्थायी कार्बन भंडार सुरक्षित रहते हैं और उनपर बढ़ते तापमान का खास असर नहीं पड़ता। अब नए अध्ययन में सामने आया है कि लगातार बढ़ती गर्मी इन गहरे कार्बन भंडारों को भी तोड़ रही है। यह प्रक्रिया धरती से लेकर पूरे वायुमंडल के लिए खतरनाक मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका असर अभी से दिखाई देने लगा है। यूरोप में पड़ी भीषण गर्मी इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
यूरोप में पड़ी थी भीषण गर्मी 

यूरोप में पड़ रही गर्मी के आंकड़ों के अनुसार इस साल यहां के लोगों ने अप्रत्याशित रूप से भीषण गर्मी का सामना किया। पूरे महाद्वीप से संकलित आंकड़ों के अनुसार करीब 10 हजार लोगों की जान गई है। अध्ययनकर्ताओं  के अनुसार जून के अंत में इसमें तेजी से तब वृद्धि हुई जब यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से भीषण गर्मी की आवृत्ति बढ़ रही है। यूरोएमओएमओ के आंकड़े कहते हैं, 28 जून को खत्म हुए सप्ताह में करीब 14,260 अधिक लोगों की जान गई। इनमें से 12,000 से अधिक लोग 65 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की थीं। 
आने वाले सालों में होगी खतरनाक 


रिपोर्ट के अनुसार आने वाले सालों में यह और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण कार्बन डाइआॅक्साइड बड़ी मात्रा में वातावरण में पहुंच सकती है। बता दें कि कार्बन पर हुआ यह अध्ययन अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित हार्वर्ड फॉरेस्ट में किया गया। यहां वैज्ञानिक पिछले कई दशकों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। इस जंगल की सतह से करीब 10 सेंटीमीटर नीचे विशेष तारों का एक नेटवर्क बिछाया गया। इस अध्ययन का नेतृत्व मरीन बायोलॉजिकल लेबोरेटरी के वैज्ञानिक जेरी मेलिलो ने किया। मेलिलो पिछले 37 वर्षों से इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं। 
मिट्टी में मौजूद वे स्थाई कार्बनिक 

रिसर्च के चौथे दशक में वैज्ञानिकों ने पाया कि मिट्टी में मौजूद वे स्थायी कार्बनिक पदार्थ टूटने लगे हैं। इनके विघटन से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइआॅक्साइड वातावरण में निकल रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवों यानी माइक्रोब्स की अहम भूमिका है। बता दें कि द माइक्रोब्स मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों को तोड़ते हैं। साथ ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का रीसायकल करते हैं। बढ़ते तापमान के कारण इन सूक्ष्मजीवों की संरचना और व्यवहार बदल रहा है, जिससे मिट्टी में जमा कार्बन तेजी से खत्म हो रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह शोध इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया की मिट्टी में लगभग 3,500 अरब मीट्रिक टन कार्बन संग्रहित है। यह जो पृथ्वी के पूरे वायुमंडल में मौजूद कार्बन से कई गुना अधिक है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि अगर यह पूरा कार्बन बाहर आ गया तो खतरनाक क्लाइमेट फीडबैक लूप बन जाएगा। इससे पूरी पृथ्वी पर भयानक रूप से गर्मी की शुरुआत हो जाएगी। यानी पूरा का पूरा इकोसिस्टम ही बदल जाएगा। इससे पृथ्वी पर कहीं सूखा तो कहीं भीषण गर्मी पड़ेगी। साथ ही कुछ जगहों पर बारिश और समुद्र में आया सैलाब भयानक तबाही लाएगा।