वैज्ञानिकों ने की सौरमंडल में नए ग्रह की खोज, बौने ग्रह की मिल सकती है उपाधि 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। वैज्ञानिकों ने सौरमंडल में नए ग्रह की खोज की है। यह रहस्यमय ग्रह सूर्य के चक्कर लगाता है। इसको लेकर वैज्ञानिकों ने कई दावे किए हैं। यह खोज एनएसएफ-डीओई वेरा सी के आंकड़ों की मदद से की गई है।आगे चलकर इस पिंड को सौरमंडल के नए बौने ग्रह की उपाधि मिल सकती है।
हमारा अंतरिक्ष रहस्यों से भरा 

हमारा अंतरिक्ष रहस्यों से भरा है। यहां घूमता हर एक खगोलीय पिंड हमें हैरान कर देता है। वैज्ञानिकों ने अब हमारे सौरमंडल में एक नया ग्रह खोज निकाला है। सौर मंडल के सबसे दूर के कोने में इस नए बौने ग्रह की खोज की गई है। खगोलशात्रियों के अनुसार सौरमंडल के बाहरी हिस्से में खोजा  गया विशाल बर्फीला पिंड भविष्य में छठा मान्यता प्राप्त बौना ग्रह बन सकता है। इस पिंड का नाम 2026 ईडी-138 है। यह सूर्य से करीब 46 खगोलीय इकाई की दूरी पर स्थित है। शुरूआती अनुमान के अनुसार इसका व्यास 600 से 1,500 किलोमीटर के बीच हो सकता है। एनएसएफ-डीओई वेरा सी के आंकड़ों की मदद से खोजे गए इस ग्रह को अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा भी मान्यता मिल सकती है। सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के खगोलशास्त्री मैथ्यू होलमैन ने इसकी खोज में बड़ी भूमिका निभाई है। अक्तूबर महीने में उन्होंने रुबिन आॅब्जर्वेटरी के शुरूआती आंकड़ों की एक विशेष सर्च कोड के जरिए जांच की। यह कोड उन्होंने अपने सहयोगी केविन नेपियर के साथ मिलकर तैयार किया था। यह सॉफ्टवेयर अरबों खगोलीय संकेतों का विश्लेषण करके उन संकेतों को आपस में जोड़ता है, जो अंतरिक्ष में एक ही गतिशील पिंड से संबंधित होते हैं।
चमक ने खींचा ध्यान 

होलमैन ने जब इस पिंड की खोज की, तो उसकी चमक और सूर्य से दूरी ने उनका ध्यान खींचा। उन्हें शुरूआत में यकीन नहीं हुआ कि इतनी बड़ी वस्तु अब तक वैज्ञानिकों की नजरों से कैसे बची रही। फिर उन्होंने खोज की पुष्टि के लिए अतिरिक्त आंकड़ों की जांच की। रुबिन आॅब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मारियो जुरिक ने भी इसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की और मार्च 2026 से संबंधित 20 अतिरिक्त अवलोकन खोजे।  कुल मिलाकर रुबिन टेलीस्कोप ने 4 मार्च से 11 जुलाई 2026 के बीच 20 अलग-अलग रातों में इस पिंड को 30 बार रिकॉर्ड किया था। इसके साथ ही पुरानी तस्वीरों से भी इसका अवलोकन किया गया। 
बौना ग्रह मानने के लिए कुछ खास शर्तें 

नए ग्रह को मान्यता मिलने के सवाल पर वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी खगोलीय पिंड को बौना ग्रह मानने के लिए कुछ खास शर्तें होती हैं। उसे सूर्य की परिक्रमा करनी चाहिए, उसका अपना गुरुत्वाकर्षण उसे लगभग गोल आकार देने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। साथ ही उसने अपनी कक्षा के आसपास के दूसरे पिंडों को हटाकर उस क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित नहीं किया होना चाहि। वह किसी दूसरे ग्रह का उपग्रह नहीं होना चाहिए। नए ग्रह के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुमानित आकार इतना बड़ा है कि इसका गुरुत्वाकर्षण इसे लगभग गोल आकार दे सकता है। फिलहाल नया ग्रह सूर्य से करीब 46 एयू की दूरी पर है। बता दें कि एयू एक खगोलीय इकाई है। यह पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी के बराबर होती है। यह करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। 
सेरो पचोन पर्वत पर खोज

वैज्ञानिकों का कहना है कि चिली के सेरो पचोन पर्वत पर स्थित वेरा सी. रुबिन आॅब्जर्वेटरी से इसकी आगे की खोज की जाएगी। बता दें कि यह वेधशाला आधुनिक खगोल विज्ञान की सबसे अहम वेधशालाओं में से एक है। इसका सिमोनी सर्वे टेलीस्कोप 8.4 मीटर के मुख्य दर्पण और 3.2 गीगापिक्सल के विशाल कैमरे से लैस है। इसका प्रमुख प्रोजेक्ट लिगेसी सर्वे आॅफ स्पेस एंड टाइम जून 2026 में शुरू हुआ था। इसके तहत टेलीस्कोप अगले 10 वर्षों तक दक्षिणी आकाश का बार-बार सर्वे करेगा। हर कुछ रातों में पूरे दक्षिणी आकाश की तस्वीरें लेगा। इससे वैज्ञानिकों को ऐसे छोटे और दूरस्थ खगोलीय पिंडों का पता लगाने में मदद मिलेगी। यह पहले भीड़भाड़ वाले तारकीय क्षेत्रों में छिपे रह जाते थे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने अभी तक पांच बौने ग्रहों को मान्यता दी है। इनमें प्लूटो, सेरेस, एरिस, हौमेया और माकेमाके शामिल हैं। 2006 में प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया था। इसके बाद सौरमंडल में मान्यता प्राप्त ग्रहों की संख्या आठ रह गई थी।