आइंस्टीन के फॉर्मूले का प्रयोग कर की बड़ी खोज, सामने आया ब्लैक होल का रहस्य

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने आइंस्टीन के फॉमूर्लें का प्रयोग कर अंतरिक्ष में बड़ी खोज कर डाली। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से शोधकर्ताओं ने ऐसे ब्लैक होल को खोज निकाला है जिसने विज्ञान की थ्योरी को पलट दिया है। 
रहस्यों का भंडार है हमारा ब्रह्मांड 

हमारा ब्रह्मांड रहस्यों का भंडार है। इस क्षेत्र में अनवरत खोज जारी रहती है।   वैज्ञानिकों ने लिटिल रेड डॉट्स नाम की प्राचीन गैलेक्सीज के अध्ययन के दौरान ऐसी सफलता हासिल की है जिसने पुरानी थ्योरी को बदल दिया है। बता दें कि आज से पहले वैज्ञानिक यह मानते आए थे कि पहले आकाशगंगाएं यानी गैलेक्सी का निर्माण होता है, उसके बाद उसके केंद्र में ब्लैक होल का विकास होता है। अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से जो नई खोज हुई है उसने पुरानी अवधारणाओं को पूरी तरह से पलट दिया है। शोध के अनुसार वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के शुरूआती दौर में एक ऐसा ब्लैक होल मिला है, जो अपनी गैलेक्सी से पहले ही बनकर तैयार हो गया था। यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की शुरूआत मानी जा रही है। 
डॉट्स को वैज्ञानिक मान रहे हैं रहस्यमय 

अंतरिक्ष में मौजूद लिटिल रेड डॉट्स को वैज्ञानिक बेहद रहस्यमय मान रहे हैं। ऐसे इसलिए है क्योंकि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से हुई खोज से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ब्लैक होल उम्मीद से कहीं ज्यादा विशाल है। इसने अपनी ही गैलेक्सी को वजन के मामले में बहुत पीछे छोड़ दिया है। इस हैरान करने वाले खुलासे के बाद अब ब्लैक होल के बनने की थ्योरी पर नए सिरे से रिसर्च शुरू हो सकती है। बता दें कि इस ब्लैक होल को सबसे पहले 2022 में देखा गया था। लगातार इस पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि इसका फैलाव हो रहा है। यह अपने आस-पास मौजूद तारों को निगलने में लग गया है। ऐसे मे इस ब्लैक होल के बारे में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी। जब वैज्ञानिक इस पर लगातार निगरानी करते हुए खोज करने लगे तो कई रहस्य सामने आ गए। 
ब्रह्मांड में ज्यादा संख्या में हैं ब्लैक होल

वैज्ञानिकों ने देखा कि ब्लैक होल में मौजूद लाल बिंदु शुरूआती ब्रह्मांड में बहुत ज्यादा संख्या में मौजूद थे। बिग बैंग के करीब 1.5 अरब साल बाद ये अचानक से अंतरिक्ष से गायब होने लगे थे। इन लिटिल रेड डॉट्स ने वैज्ञानिकों को इसलिए भी हैरान किया क्योंकि इनके केंद्र में बहुत ही भारी-भरकम ब्लैक होल छिपे हुए थे। सामान्य तौर पर किसी ब्लैक होल को इतना विशाल होने में अरबों साल का समय लगता है। जेम्स वेब टेलीस्कोप ने ब्रह्मांड के 1 अरब साल से कम उम्र के होने पर ही इन सुपरमैसिव ब्लैक होल्स को ढूंढ निकाला। 
कम समय में ब्लैक होल बड़े हो गए

वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे थे कि इतने कम समय में ये ब्लैक होल इतने बड़े कैसे हो गए। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस ब्लैक होल के वजन को नापने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर केंद्र में मौजूद ब्लैक होल सच में इतना भारी है, तो उसके आसपास घूमने वाली गैस की गति भी बहुत तेज होनी चाहिए। इसके लिए जेम्स वेब टेलीस्कोप के नियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ का इस्तेमाल किया गया। इस इंस्ट्रूमेंट की मदद से ब्लैक होल के चारों ओर घूम रही हाइड्रोजन गैस का एक नक्शा तैयार किया गया। डेटा से पता चला कि गैस बिल्कुल उसी तरह केंद्र के चक्कर लगा रही थी, जैसे हमारे सौर मंडल के ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं। विज्ञान की भाषा में इस घटना को केपलेरियन मोशन कहा जाता है। इससे साफ हो गया कि इस गैलेक्सी का ज्यादातर वजन किसी बिखरे हुए तारों के समूह में नहीं बल्कि केंद्र में मौजूद एक ही भारी-भरकम ब्लैक होल में सिमटा हुआ है।