जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। नासा, आस्ट्रेलिया और चीन के मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रशांत महासागर में तीव्र अल नीनो की पुष्टि की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है। इसका असर बेहद खौफनाक होगा। रिपोर्ट के अनुसार सबसे खतरनाक विलेन भारत की ओर बढ़ रहा है। वहीं इससे पूरे दुनिया के प्रभावित होने की भी संभावना है।
सुपर अल नीनो को लेकर खूब चर्चाएं
महीनों से मीडिया जगत में सुपर अल नीनो को लेकर खूब चर्चाएं हैं। अब इस पर कई चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। चीन के मौसम वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। यह मौसमी बदलाव इस साल की शरद ऋतु और सर्दियों में अपने चरम पर होगा। इस चेतावनी ने दक्षिण एशिया, खासकर भारत की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 70 प्रतिशत पानी जून से सितंबर के के बीच मॉनसून से प्राप्त करता है। ऐसे में सुपर अल नीनो के कारण इस बार मॉनसून के कमजोर रहने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी है कि इस बार बारिश सामान्य से काफी कम हो सकती है। खेती और पानी के संकट को लेकर देश में अभी से अलर्ट जैसी स्थिति बन गई है।
तेजी से गर्म हुआ प्रशांत महासागर का पानी
वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हुआ है। हाल ही में यूरोपीय क्लाइमेट एजेंसी की सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में 1000 किमी चौड़ी गर्म पानी की दीवार यानी केल्विन वेव आगे बढ़ते देखी थी। अमेरिका के क्लाइमेट पूवार्नुमान केंद्र के अनुसार, जुलाई के आखिर तक अल नीनो बढ़ने की संभावना बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है। कुछ समय पहले अप्रैल में यह अनुमान 65 प्रतिशत था। इस साल आने वाला अल-नीनो काफी शक्तिशाली हो सकता है। 2027 तक इसके एक मजबूत घटना में बदलने की पूरी संभावना है। इसे सुपर अल-नीनो कहा जा रहा है।
आस्ट्रेलिया ब्यूरो की चेतावनी
आस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने कुछ दिन पहले ही बताया था कि जून तक अल नीनो के आने की संभावना है। प्रशांत महासागर से जुड़े मौसम के बदलावों पर नजर रखने वाली इस संस्था को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। लेकिन अब नासा और यूरोप के एक सैटेलाइट ने अल नीनो का संकेत देने वाले सुराग के रियल टाइम का पता लगाया है। बता दें कि नासा ने साल 2020 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच लांच किया था। यह सैटेलाइट हर 10 दिन में पूरे महासागर में पानी की ऊंचाई की मांप करता हैऔर उसका नक्शा बनाता है। यह एडवांस सैटेलाइट समुद्र के जलस्तर में होने वाले बदलावों पर नजर रखती है और समुद्र के तापमान को प्रभावी ढंग से माप सकती है। इसकी वजह यह है कि पानी के गर्म होने से उसका भौतिक स्तर उठ जाता है। सैटेलाइट के आकलन से जानकारी मिली है कि जनवरी के आखिर में एक छोटी केल्विन लहर का निर्माण हो रहा था और यह बाद खत्म हो गई। मार्च के पहले सप्ताह में करीब 1000 किमी चौड़ी एक नई लहर पूर्व दिशा की तरफ बढ़ी। इसके कारण मई के मध्य तक पेरू के आसपास समुद्र का जलस्तर लंबे समय के औसत से 15 सेमी से भी ज्यादा ऊपर उठ गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ेगी। इसके साथ ही मानसून प्रभावित होगा।
अल नीनो एक प्राकृतिक घटना
वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है। प्रशांत महासागर का पानी गर्मी होता है, तो अल-नीनो कहा जाता है। लेकिन समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा (करीब 2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर) बढ़ जाता है, जिसे सुपर अल-नीनो कहा जाता है। अल नीनो मौसम के पैटर्न को प्रभाविक करता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अल-नीनो बीते 140 वर्षों में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और ब्रिटेन के मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसारप अगले पांच साल दुनियाभर में फसलों, नदियों और कई चीजों को झुलसाने वाले हो सकते हैं। 2030 तक तापमान में लगभग 2 डिग्री की बढ़ोत्तरी हो सकती है। अल नीनो पैटर्न से बारिश सामान्य से काफी कम होने के अनुमान के बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इससे जुड़ी तैयारी पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इस बार की खरीफ फसल के लिए बीज और खाद की कोई तंगी नहीं है। सरकार ने भी इससे निपटने के प्रयास तेज कर दिए हैं।





