जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले भारतीयों के लिए बड़ी खबर है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस सप्ताह उन्हें एक दुर्लभ आकाशीय घटना के दीदार होने वाले हैं। वे आसमान में शुक्र और बृहस्पति के कॉस्मिक किस का दीदार कर सकेंगे।
9 से 10 जून के बीच शाम दिखेगा नजारा
अंतरिक्ष प्रेमियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह सप्ताह खास होने वाला है। आज यानी 9 से 10 जून के बीच शाम को पश्चिमी आकाश में शुक्र और बृहस्पति ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। 9 जून को दोनों ग्रहों का सबसे करीबी कंजंक्शन होगा। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को बिना टेलीस्कोप के भी आसानी से देखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इस खास और बेहद दिलचस्प घटना को ग्रहों की युति कहा जाता है। इस आकर्षक खगोलीय घटना के अवलोकन के लिए दिल्ली स्थित नेहरू तारामंडल तीन मूर्ति भवन के सामने के मैदान में विशेष सत्र आयोजित करेगा। यह आम लोगों के लिए निशुल्क आकाश-अवलोकन सत्र होगा।
तारामंडल ने साझा की जानकारी
दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय यानी पीएमएमएल के तहत आने वाले तारामंडल ने इसकी जानकारी साझा की है। जिसमें कहा गया है कि सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में बृहस्पति को करीब 12 साल लगते हैं। जबकि, शुक्र अपनी परिक्रमा लगभग 224 दिन में पूरी करता है। इसी वजह से इन दोनों ग्रहों की युति लगभग हर 10 से 15 महीने में होती है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। बयान में यह भी कहा गया है कि इससे पहले शुक्र एवं बृहस्पति की युति 12 अगस्त 2025 को देखी गई थी। इसमें बताया गया है कि शुक्र और बृहस्पति की युति कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन यह बिना दूरबीन की मदद से देखी जा सकने वाली सबसे आकर्षक खगोलीय घटनाओं में से एक होती है। अधिकारियों ने कहा कि पहली बार ऐसा होगा जब 9 जून 2026 को ग्रहों का यह खगोलीय मिलन पूरे भारत में बिना किसी उपकरण के आसानी से दिखाई देगा।
रात 10 बजे के बाद भी दिखेगी घटना
इस ऐतिहासिक नजारे को आम तौर पर खगोलशास्त्री कॉस्मिक किस यानी ब्रह्मांडीय चुंबन भी कहते हैं। दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर इसका दृश्य और भी प्रभावशाली हो सकता है। दिल्ली स्थित नेहरू तारामंडल ने यह भी कहा कि यदि मौसम और आकाश की स्थिति अनुकूल रहती है तो यह युति लगभग रात साढ़े आठ बजे तक दिखाई देगी। इस आकर्षक खगोलीय घटना के दौरान पृथ्वी से दिखाई देने वाले दो सबसे चमकीले ग्रह-शुक्र और बृहस्पति-एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इसे अद्भुत घटना करार दिया। उनके अनुसार 9 जून को ग्रहों का सबसे करीबी कंजंक्शन देखने को मिलेगा। खगोल विज्ञान की भाषा में कंजंक्शन उस स्थिति को कहा जाता है, जब पृथ्वी से देखने पर दो खगोलीय पिंड एक-दूसरे के बेहद नजदीक दिखाई देते हैं। वास्तविकता में शुक्र और बृहस्पति के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी है, लेकिन पृथ्वी से देखने पर इनकी स्थिति ऐसी बनेगी कि दोनों ग्रह लगभग साथ-साथ नजर आएंगे। खगोल विज्ञान के शौकीन यदि इस दुर्लभ नजारे को देखना चाहते हैं तो वे सूर्यास्त के करीब 45 मिनट बाद पश्चिम दिशा में आसमान की ओर देखें। लखनऊ और पटना स्थित इंदिरा गांधी तारामंडल के अधिकारियों ने भी इस घटना की पुष्टि की। उनके अनुसार इस नजारे को बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है। दूरबीन या छोटे टेलिस्कोप से इस नजारे को देखना कहीं अधिक बेहतर अनुभव कराएगा।





