ब्रह्मोस की ताकत देखकर बदले तुर्की के सुर, बोला भारत के सथ अच्छे संबंध चाहता है हमारा देश

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। ब्रह्मोस मिसाइलों के सामने दुनिया नतमस्तक हो रही है। अद्भुत मारक क्षमता और इसके सटीक वार से दुश्मन का बच पाना मुश्किल होता है। अब भारत की इसी मिसाइल और ड्रोन की ताकत को समझते हुए तुर्की के सुर बदलने लगे हैं। वहां के विदेशमंत्री ने भारत की नाराजगी दूर करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
भारत से ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदेगा साइप्रस 

तुर्की के कट्टर दुश्मन साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइलें और कामिकाज ड्रोन खरीदने की तरफ तेजी से कदम बढ़ाए हैं। साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें और मानवरहित हवाई वाहन खरीदने की इच्छा जताई है। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की हाल ही में नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान इस संभावित खरीद पर बात की है। उन्होंने कहा कि साइप्रस ब्रह्मोस के अलावा भारत से कामिकाज ड्रोन और स्काईस्ट्राइकर खरीदने में दिलचस्पी रखता है। अब निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की यात्रा और भारत से मजबूत हो रहे संबंध के बाद तुर्की की हवा निकल गई है। उसे पता चल गया है कि अगर भारत ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें और ड्रोन दे दिए तब उसकी क्या हालत होगी। ऐसे में भारत को लेकर तुर्की की रेसेप तैयप एर्दोगन सरकार के सुर बदल गए हैं। तुर्की के विदेश मंत्री ने भारत से नाराजगी दूर करने और अच्छे संबंध बनाने की बात कही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारत-तुर्की संबंधों के बीच में पाकिस्तान नहीं आना चाहिए। 
तुर्की का यह बदला हुआ रुख 

बता दें कि तुर्की का यह बदला हुआ रुख तब दिखा है, जब तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने एक कार्यक्रम में भारत-तुर्की संबंधों पर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अगर भारत को इस बात से नाराजगी है कि हमारे पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध हैं तो ऐसे तो कई देश हैं, जिनके इस्लामाबाद के साथ करीबी रिश्ते हैं। पाकिस्तान से रिश्ते को आपसी संबंधों के बीच में नहीं लाया जाना चाहिए।' फिदान ने आगे कहा कि द्विपक्षीय स्तर पर भारत के साथ हमारी कोई समस्या नहीं है। हम भारत से आग्रह करते हैं कि वह इस मुद्दे  यानी पाकिस्तान को किसी दूसरे नजरिए से ना देखे। फिदान ने भारत को इस बात के लिए मनाने की कोशिश की है कि तुर्की-पाकिस्तान के रिश्ते की वजह से दिल्ली उनसे दूरी ना बनाए। फिदान का बयान साफतौर पर तुर्की के बदले हुए रुख को दिखाता है। बता दें कि तुर्की ने बीते कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों से लगातार पाकिस्तान की भाषा बोली है। कश्मीर और दूसरे मुद्दों पर पाकिस्तान की तरफदारी के अलावा आॅपरेशन सिंदूर के वक्त भी तुर्की के नेता खुलकर इस्लामाबाद का पक्ष लेते हुए साफ देखे गए थे। बता दें कि साइप्रस के ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की संभावना ने तुर्की के रणनीतिक और सुरक्षा हलकों में खतरे की घंटी बजा दी है। भारत-साइप्रस का रक्षा सौदा तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित होगा। खासकर यह देखते हुए कि उसने दशकों से उत्तरी साइप्रस पर कब्जा जमा रखा है। यह पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में भारत में बने हथियार प्रणालियों की पहली तैनाती होगी। 
रक्षा विश्लेषकों को डर 
अंकारा में रक्षा विश्लेषकों को डर है कि भूमध्यसागर में इन सुपरसोनिक मिसाइलों या कामिकाज ड्रोनों की तैनाती क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को मौलिक रूप से बदल सकती है। यह तुर्की की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की ब्रह्मोस मिसाइल अब एशिया की सबसे चर्चित डिफेंस एक्सपोर्ट बनती जा रही है। इसकी सुपरसोनिक स्पीड, सी-स्किमिंग तकनीक और घातक मारक क्षमता इसे दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में शामिल करती है। फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश इसे चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव के खिलाफ मजबूत हथियार मान रहे हैं। फिलीपींस से लेकर वियतनाम और इंडोनेशिया तक कई देश इसे खरीदने के लिए लाइन में हैं। इसकी वजह सिर्फ इसकी रफ्तार नहीं है, बल्कि वह डर है जो यह समुद्र में दुश्मन के जहाजों और सैन्य ठिकानों के बीच पैदा करती है। ब्रह्मोस को गरीब देशों का सबसे बड़ा नेवल इक्वलाइजर बताया जा रहा है। यह मिसाइल कम बजट वाले देशों को भी चीन जैसी बड़ी नौसैनिक ताकत के सामने खड़े होने की ताकत देती है। यही कारण है कि अब ब्रह्मोस सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि एशिया की नई सामरिक राजनीति का बड़ा चेहरा बनती जा रही है। ब्रह्मोस  की ताकत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान परस्त देश अब भारत से गहरी दोस्ती चाहने लगा है।