जन प्रवाद, ब्यूरो।
दिल्ली। एमएलसी चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में दो फाड़ होते हुए दिखाई देने लगे हैं। भाजपा ने शिवसेना पर साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ने के आरोप लगाए हैं। वहीं, इसके जवाब में शिवसेना नेता इशारों में राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की मांग उठा रहे हैं। राज्य की कुल 5 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें गठबंधन तीन सीटों पर जीता है।

बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक में जीत दर्ज की। शिवसेना के किरण सरनाइक ने अमरावती शिक्षक सीट पर जीत हासिल की। भाजपा उम्मीदवार कौस्तुभ गावडे पुणे शिक्षक से जीते। वहीं नागपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई। खास बात है कि महाराष्ट्र विधान परिषद में 78 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा के पास सबसे ज्यादा 35 सदस्य हैं। इसके बाद शिवसेना 12 और एनसीपी 10 पर है।
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ कमल उत्तमराव बन ने लिखा अपनी पोस्ट में लिखा कि पुणे और नागपुर की शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों में गठबंधन में साथी शिवसेना ने उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं दिया। पुणे में आखिरी समय में सचिन सनव को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति गठबंधन की एकता पर चोट दी है। छत्रपति संभाजी नगर में अब्दुल्ल सत्तार ने खुलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खिलाफ प्रचार किया। उसका भी असर पड़ा।

उन्होंने लिखा कि अगर शिवसेना ने भाजपा और एनसीपी की मदद कर महायुति गठबंधन का धर्म निभाया होता तो महायुति सभी पांचों सीटों पर जीत सकती थी। पुणे की एक सीट के लालच में शिवसेना ने अपने सहयोगियों को मुश्किल स्थिति में ला दिया और तीन सीटें जीतने का मौका गंवा दिया।





