जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। राजस्थान का बालोतरा और छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला देश की तकदीर बदल सकते हैं। यहां दुनिया के दुर्लभतम खनिजों का भंडार मिला है। ये खनिज इसरो के रॉकेट, मिसाइल, परमाणु रिएक्टर और ईवी गाड़ियों के निर्माण में गेमचेंजर साबित होंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर जंग
इस समय पूरी दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर नई जंग चल रही है। इसमें अमेरिका से लेकर चीन समेत दुनिया के कई बड़े देश शािमल हैं। आने वाले समय में निकल, लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स हर देश की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनने वाले हैं। ये तत्व किसी भी देश के विकास को तेजी से बढ़ाएंगे। भारत ने इसी क्रिटिकल मिनरल्स की खान को खोज निकाला है। दक्कन गोल्ड माइंस ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में निकल, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स के बड़े भंडार मिलने की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसारप यह खोज भारत के क्रिटिकल मिनरल मिशन के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
भालुकोना प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
छत्तीसगढ़ के भालुकोना प्रोजेक्ट के तहत काम कर रही कंपनी ने इसकी खोज की है। कंपनी का कहना है कि ड्रिलिंग के दौरान जमीन के नीचे कई मिनरलाइज्ड लेयर की पहचान की गई है। यह लेयर करीब 60 मीटर चौड़ी है। इसमें निकल और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हैं। इसकी कीमत अरबों रुपये में बताई जा रही है। वहीं कंपनी का मानना है कि कीमत का फिलहाल सटीक आकलन अभी नहीं किया गया है। ऐसे में कंपनी इस बारे में अभी कोई बयान नहीं जारी करना चाहती है। बता दें कि दुनियाभर के वैज्ञानिक निकल को फ्यूचर मेटल यानी भविष्य का धातु कहते हैं। ईवी बैटरियों को बनाने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। वहीं सुपर एलॉय, एयरक्राफ्ट इंजन, डिफेंस इक्यूपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स में इसका इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि दुनिया भर में निकल और दूसरे क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर होड़ मची हुई है। इस क्रिटिकल मिनरल को पहले हासिल करने के लिए अमेरिका और चीन पूरी दुनिया का चक्कर लगा रहे हैं। चीन पहले से ही कई महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ रखता है। वहीं अमेरिका चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नए माइनिंग प्रोजेक्ट्स और रिसर्च पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है।
सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में खजाना
वहीं दूसरी ओर राजस्थान के बालोतरा जिले के करीब 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भी देश के सबसे दुर्लभ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्स का विशाल भंडार मिला है। केंद्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कमेटी की मुहर के बाद यह साफ हो गया है कि इस प्राचीन ज्वालामुखी कुंड के गर्भ में नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे बेशकीमती खनिजों का अथाह भंडार छिपा हुआ है। बता दें कि तकनीकी भाषा में इन्हें रेयर अर्थ एलिमेंट्स और हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स कहा जाता है। ये वो अत्याधुनिक खनिज हैं, जिनके बिना भविष्य की आधुनिक तकनीकों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस खजिनों से इसरो के लिए रॉकेट और डीआरडीओ की घातक मिसाइलें बनेंगी। इसके अलावा फाइटर जेट्स के लिए भी इस मिनिरस से घातक मिसाइलें और फाइटर जेट्स के एयरोस्पेस इंजन के लिए बेहद मजबूत सुपरअलॉय मटेरियल बनेगा। यह परमाणु और ऊर्जा क्षेत्र में भी देश को एक नई दिशा प्रदान करेगा। देश के परमाणु रिएक्टरों, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट, मेडिकल व साइंटिफिक मशीनरी, इलेक्ट्रिक कारों की बैटरियों और माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स चिप को यह खनिज नई शक्ति देगा।
खजाने का होगा तकनीकी मूल्यांकन
इस महाखजाने के तकनीकी मूल्यांकन और तेजी से खनन की संभावनाओं को टटोलने के लिए सीएम भजनलाल शर्मा ने बड़ी योजना तैयार की है। सीमए ने इसे देश की सामरिक सुरक्षा के लिए गेमचेंजर बताते हुए खान विभाग और जिला कलेक्टर को केंद्र के साथ मिलकर तुरंत एक 'नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया। जिससे इस प्रोजेक्ट की फाइलें बिना किसी देरी के आगे बढ़ सकें। इन ब्लॉक्स के तकनीकी मूल्यांकन के लिए 3 अनुभवी कंपनियों को सर्वेक्षण का काम भी आवंटित कर दिया गया है।





