नागोया, एजेंसी। मोना अग्रवाल ने सोमवार को यहां फाइनल में शानदार वापसी करते हुए अपनी हमवतन अवनि लेखरा को पछाड़कर महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया जिससे भारत ने शीर्ष दो स्थान हासिल कर एशियाई पैरा खेलों की पदक तालिका में खाता खोला। पेरिस पैरालंपिक 2024 की कांस्य पदक विजेता मोना ने छठे स्थान से वापसी करते हुए 250.0 अंक के साथ एशियाई पैरा खेलों का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने दो बार की पैरालंपिक चैंपियन अवनि को महज 0.4 अंक से पछाड़ा। गत चैंपियन के तौर पर उतरीं 24 वर्षीय अवनि को 249.6 अंकों के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अवनि के इस पदक से भारत ने 2028 लॉस एंजिलिस पैरालंपिक के लिए दूसरा कोटा स्थान भी हासिल कर लिया। मोना ने पिछले महीने विश्व निशानेबाजी पैरा स्पोर्ट (डब्ल्यूएसपीएस) चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर पहले ही एक कोटा स्थान हासिल कर लिया था। इस स्पर्धा में दक्षिण कोरिया की युनरी ली ने 227.9 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। एसएच1 वर्ग निचले अंगों में विकलांगता वाले निशानेबाजों के लिए है। जयपुर की इन दोनों निशानेबाजों के बीच मुकाबला 24 शॉट के फाइनल के आखिरी शॉट तक चला। निर्णायक शॉट से पहले मोना के 239.1 अंक थे जबकि अवनि 239.2 अंक के साथ उनसे 0.1 अंक आगे थीं। मोना ने आखिरी शॉट में शानदार 10.8 अंक हासिल किए जबकि अवनि 10.5 अंक ही जुटा सकीं। इस तरह 38 वर्षीय दो बच्चों की मां मोना ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मोना अब 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में हिस्सा लेंगी। उनकी नजरें इस स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीतकर दोहरी स्वर्णिम सफलता हासिल करने पर होंगी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सिर्फ एक बात जानती थी कि मुझे अपनी प्रक्रिया लगातार दोहरानी है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मुझे विश्वास था कि अगर मैं ऐसा करती रही तो फिर से शीर्ष पर पहुंच सकती हूं। इसलिए जब मैं पीछे चल रही थी और बाहर होने की कगार पर थी, लेकिन तब मैंने ज्यादा नहीं सोचा उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा, शांत रही और खुद पर विश्वास करती रही। ’’ मोना ने क्वालीफिकेशन में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने आठ निशानेबाजों के बीच 629.1 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल करते हुए एशियाई पैरा खेलों का क्वालीफिकेशन रिकॉर्ड बनाया था। कार दुर्घटना के बाद व्हीलचेयर पर बैठकर निशाना लगाने वाली अवनि 626.4 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही थीं। हालांकि फाइनल की शुरुआत में तस्वीर अलग थी। हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरी अवनि ने 10.8 अंक के साथ शुरुआत की जबकि मोना ने 10.1 अंक हासिल किए। पहले पांच शॉट के बाद अवनि 53.2 अंक के साथ आगे थीं। अगले पांच शॉट के बाद भी उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और 104.8 अंक तक पहुंच गईं। उस समय मोना 102.9 अंक के साथ छठे स्थान पर थीं। इसके बाद एलिमिनेशन चरण में मुकाबले का रुख बदल गया। अवनि लगातार कुछ कम स्कोर वाले शॉट लगाने लगीं जबकि मोना ने धीरे-धीरे अपनी स्थिति में सुधार किया। इससे मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। मोना ने कहा, ‘‘अगर आप मेरे पिछले मुकाबलों के रिकॉर्ड देखें तो आपको इसी तरह का पैटर्न नजर आएगा। मैं आमतौर पर धीमी शुरुआत करती हूं, लेकिन धीरे-धीरे अपनी स्थिति बेहतर करते हुए आगे बढ़ती हूं। मैं अभ्यास के दौरान भी इस पर काम कर रही हूं। मैं सीख रही हूं कि मुकाबले को कैसे नियंत्रित करना है और पिछड़ने के बावजूद वापसी कैसे करनी है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब परिस्थितियां मेरे अनुकूल नहीं होतीं, तब मैं हार नहीं मानती। इसके बजाय मैं स्थिति पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने और पिछड़ने के अंतर को कम करने की कोशिश करती हूं। मैं अभ्यास के दौरान इसी चीज पर काम करती हूं। ’’ मोना ने कहा कि हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में उन्हें मुश्किल अनुभव से सबक सीखने को मिला था जिसमें वह फाइनल में पहुंची थीं, लेकिन छठे स्थान पर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘‘तब वो मेरा तीसरा ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। जब आप हार जाते हैं या पदक जीतने में नाकाम रहते हैं, तो बहुत दुख होता है। लेकिन मैं अपने सीनियर खिलाड़ियों से सीखती हूं, उनके अनुभवों से सबक लेती हूं और आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की तैयारी के लिए उनका इस्तेमाल करती हूं। ’’मोना के लिए यह स्वर्ण पदक धीमी शुरुआत के बाद शानदार वापसी का परिणाम रहा। अवनि के लिए यह रजत पदक उनके शानदार करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है।





