जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। होर्मुज संकट के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि असम और नगालैंड के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत अब हम यहां धरती के नीचे छिपे उन प्राकृतिक खजाने को बाहर निकालेंगे जिससे तेल और गैस संकट के साथ देश की अन्य समस्याएं दूर होंगी।
भारत पर बरसेगी अष्टलक्ष्मी की कृपा
भारत पर अष्टलक्ष्मी की कृपा बरसने वाली है। इससे न केवल तेल का संकट खत्म होगा बल्कि गैस की सप्लाई भी मजबूत होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए बड़ा प्लान भी तैयार कर लिया है। गृहमंत्री अमित शाह ने खुद इसका ऐलान किया। उन्होंने असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों को आमने-सामने बिठाकर एक डील पर मुहर लगवाई। इसे असम-नागालैंड सीमा समझौता कहा जा रहा है। इस समझौते से इस क्षेत्र में मौजूद तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों को निकालने और उसके इस्तेमाल करने का रास्ता साफ हो गया है। शाह ने कहा कि दशकों से इन राज्यों के बीच सीमा विवाद था। इससे हम राष्ट्रीय संपदा का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। अब यह संकट दूर कर लिया गया है।
पूर्वोत्तर के विकास पर दिया जोर
बता दें पीएम मोदी अपने भाषणों में अक्सर पूर्वोत्तर के राज्यों को अष्टलक्ष्मी कहते रहे हैं। उन्होंने बार-बार इस पर जोर दिया है कि ये भारत की तरक्की का प्रवेश द्वार हैं। अब यहीं पर भारत को वो खजाना मिला है। बता दें कि विवाद की वजह से असम और नागालैंड की सीमा से लगे तेल क्षेत्रों का दोहन नहीं हो पा रहा था। नई व्यवस्था के तहत दोनों राज्य संसाधनों से होने वाले लाभ को 50-50 के आधार पर साझा करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ पुराने विवाद कम होंगे बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में तेल और गैस की खोज और उत्पादन का रास्ता खुल गया है।
तेल, प्राकृतिक गैस की खोज
पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेल, प्राकृतिक गैस और कई प्रकार के खनिजों का विशाल भंडार मौजूद है। कानून-व्यवस्था की समस्याओं, सीमा विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण इनका पूरा उपयोग नहीं हो पाया। शाह ने दावा किया कि अभी जिन क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 बैरल उत्पादन हो रहा है, अब उस क्षमता को 10 गुना से भी अधिक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक तेल क्षेत्र से ही 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य का उत्पादन संभव है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता
यह बात हम सभी जानते हैं कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। स्ट्रेट आॅफ होर्मुज बंद होने से भारत की सप्लाई रुकी हुई है। ऐसे में इस संकट से निपटने के लिए ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी। ऐसे में असम-नागालैंड समझौता इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल असम-नागालैंड का यह समझौता भारत को तेल आयात से पूरी तरह मुक्त नहीं कर सकता, लेकिन यह देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर साबित होगा।
खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
इस समझौते का असर केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में खनन क्षेत्र के लिए भी रास्ता खोल सकता है। पूर्वोत्तर भारत में कोयला, चूना पत्थर, निकल, क्रोमाइट और कई अन्य खनिजों की संभावनाएं बताई जाती हैं। यदि इन राज्यों के बीच सहयोग बढ़ता है तो निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। यहां नई परियोजनाओं को गति मिलेगी। इसका सीधा असर रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा।





