चार यात्री चंद्रमा के लिए रवाना, नासा ने आर्टेमिस-2 किया लांच

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। जिस मिशन को दुनिया भर के वैज्ञानिकों को इंतजार था आखिरकार वह लांच हो गया। नासा ने आर्टेमिस-2 मिशन की सफल लॉन्चिंग कर दी है। यह मिशन कई मायनों में खास है। इसके तहत चार अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन, ओरियन कैप्सूल में बैठकर चन्द्रमा के पास पहुंचे हैं।
नासा का विशाल एसएलएस रॉकेट


चार अंतरिक्ष यात्री नासा के विशाल एसएलएस रॉकेट में सवार होकर चंद्रमा की ओर रवाना हुए। यह मिशन 1972 के अपोलो 17 के बाद चंद्रमा का पहला मानवयुक्त मिशन है, जो आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत मानवता को फिर से चंद्रमा पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भारतीय समयानुसार आज सुबह 4 बजकर 5 मिनट पर विशाल नारंगी और सफेद एसएलएस रॉकेट ने फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से जोरदार गर्जना के साथ उड़ान भरी। रॉकेट की ध्वनि कई किलोमीटर दूर तक गूंजी, जबकि हजारों दर्शक और नासा कर्मचारी तालियां बजाते हुए और उत्साह से चीखते हुए इस ऐतिहासिक पल का गवाह बने। बता दें कि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी- नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी नासा ने अगले कुछ वर्षों में चांद पर एक स्थायी बेस स्थापित करने की योजना रखी है। बीते हफ्ते ही एजेंसी ने अगले एक दशक के चांद से जुड़े मिशन्स का रोड मैप सामने रखा था। इसमें चांद पर बेस बनाने और इसके लिए कुछ आधारभूत ढांचों को लगाने की समयसीमा का भी खुलासा किया गया।
चंद्रमा पर जाएंगे अंतरिक्ष यात्री 


इस मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाएंगे। यह उड़ान एक फ्री-रिटर्न ट्रैजक्टरी यानी विशेष मार्ग का इस्तेमाल करेगी। इसका अर्थ है कि एक बार पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने के बाद, यान चंद्रमा के पीछे से होकर गुजरेगा। उसके बाद गुरुत्वाकर्षण की मदद से स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर वापस लौट आएगा। आर्टेमिस-2 के दौरान चालक दल चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से के पार जाएगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। इस उड़ान के दौरान इंसान पृथ्वी से अपनी सबसे अधिक दूरी का नया रिकॉर्ड भी बनाएगा। बता दें कि यह मौजूदा समय में 1970 के अपोलो 13 मिशन के नाम है जो लगभग 248,655 मील दर्ज है। आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब तक जाएंगे, लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। यह एक परीक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए जरूरी तकनीक और क्षमताओं को परखना है। पूरा मिशन करीब 10 दिनों में पूरा होगा और अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे।
नासा का आर्टेमिस—2 मिशन

नासा का आर्टेमिस—2 मिशन चांद की परिक्रमा से कहीं आगे की कहानी है। यह पहली बार डीप स्पेस में मानव शरीर की वास्तविक परीक्षा लेने जा रहा है। चार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सुरक्षा सीमा से बाहर जाकर कॉस्मिक रेडिएशन और अंतरिक्षीय परिस्थितियों का सामना करेंगे। यहां उनके शरीर में होने वाले हर बदलाव को रिकॉर्ड किया जाएगा। 50 साल बाद इंसानों की यह यात्रा सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए निर्णायक वैज्ञानिक प्रयोग भी है। नासा के अनुसार यह मिशन आर्टेमिस प्रोग्राम की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाना है। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा। इस मिशन का सबसे उन्नत प्रयोग आॅर्गन आॅन-ए-चिप तकनीक है। प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री के रक्त से प्राप्त कोशिकाओं को माइक्रोचिप पर विकसित किया जाएगा। एक चिप अंतरिक्ष में जाएगी और दूसरी पृथ्वी पर रहेगी। मिशन के बाद तुलना कर यह देखा जाएगा कि डीएनए डैमेज, टेलीमीयर लंबाई और अन्य जैविक संकेतकों में कितना अंतर आया। यह पहली बार होगा जब ऐसा प्रयोग लो-अर्थ आॅर्बिट से बाहर किया जा रहा है। इस तकनीक का सबसे बड़ा महत्त्व भविष्य में सामने आएगा, जब नासा किसी भी संभावित अंतरिक्ष यात्री के शरीर पर डीप स्पेस के प्रभावों का पहले से अनुमान लगा सकेगा। यानी अंतरिक्ष यात्रा से पहले ही जोखिम का आकलन संभव होगा।