जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। अमेरिका-ईरान के बीच एक माह से अधिक चले युद्ध के बाद पाकिस्तान में 21 घंटे तक चली शांतिवार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद लगातार दूसरी शांतिवार्ता के प्रयास तेज हैं। अमेरिका की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान पहुंचने की खबर है, लेकिन ईरान संभवता तैयारी नहीं है। पाकिस्तान ईरान को मनाने की कोशिश में जुटा है।

इसी बीच होर्मुज पर तनातनी और भी बढ़ गई है। ईरान की ओर से भारत के दो जहाजों पर गोलीबारी के बाद अमेरिका ने ईरान के एक जहाज को कब्जे में ले लिया। इसके बाद टकराव और बढ़ गया। वहीं अब संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्टमें भारत और चीन सहित एशियाई देशों को झटका दिया है। रिपोर्ट में यूएन ने ईरान युत्र के कारण भारत और चीन के लिए अपना आर्थिक विकास का अनुमान कम दिया है। यही नहीं एशिया के अन्य देशों के इलोनॉमिक ग्रोथ के अनुसार को भी कम किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की ग्रोथ 5 फीसदी से भी कम रह सकती है जो ड्रैगन के लिए एक बड़ा झटका है।

बताया जा रहा है कि चीन की इकोनॉमी की रफ्तार इस साल कम रहेगी। बीते वर्ष में चीन का ग्रोथ प्रतिशत 5 था, लेकिन इस साल इसके 4.6 प्रतिशत से 4.3 प्रतिशत के बीच बढ़ने की संभावना जताई गई है। इसके पीछे की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के साथ ही मिडिल ईस्ट जंग के चलते लगातार बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को बताया गया है।

इसके अलावा भारत की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र ने ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है। इकोनॉमिस्ट के हवाले से कहा गया है कि भारत की इकोनॉमी वर्ष 2025 में 7 प्रतिशत की दर से भी ज्यादा बढ़ी थी। वर्तमान में अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते पेट्रो पदार्थों की बढ़ी कीमतों के साथ ही फर्टिलाइजर की बढ़ी कीमतों को लेकर महंगाई बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत की इकोनॉमी पर पड़ रहा है। यूएन ने बीते वर्ष की ग्रोथ रेट में एक प्रतिशत की कटौती की है। इस वर्ष भारत की इकोनॉमी 6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।





