फर्टिलाइजर को लेकर किसान चिंतित

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। अमेरिका-ईरान का युद्ध का आसर भारत पर साफ-साफ दिखाई दे रहा है। खबर तो यह भी है कि अब तक खाड़ी देखों में रह रहे आठ भारतीय मारे जा चुके हैं। साथ ही तेल और गैस की कमी भी लोगों पर आंशिक असर डाल रही है। इतना ही नहीं फर्टिलाइजर की भी कमी की आशंकाएं प्रबल हैं। अगर फर्टिलाइजर की कमी हुई तो इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगी। युद्ध का असर सिर्फभारत पर ही नहीं बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान और चीन सहित अन्य देशों में भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को वर्कफ्राम होम का आदेश दे दिया है। साथ ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें वहां आसमान छू रही हैं। साथ ही ब्राजील, आॅस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, बांग्लादेश समेत तमाम देशों पर युद्ध का सीधा असर देखा जा रहा है। 


बता दें कि इस जंग के बीच फर्टिलाइजर्स की कमी देखी जा रही है। इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। हालांकि, वर्तमान में कुछ जहाज होर्मुज होकर भारत आ रहे हैं। लेकिन, आवश्यकता के हिसाब से बहुत कम माल ही वहां से आ पा रहा है। साथ ही वेनेजुएला की सप्लाई पर अमेरिका की पाबंदी है। इन सब कारणों के चलते ही ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष गेहूं की खेती कम की जा रही है। किसानों को चिंता है कि कहीं उन्हें फर्टिलाइजर्स की आपूर्ति नहीं हुई या महंगा हो गया तो वे समस्या में पड़ जाएंगे। 


बताते चलें कि पूरी दुनिया का एक तिहाई फर्टिलाइज हॉर्मुज के रास्ते से होकर गुजरता है। यहां से तेल और गैस के साथ ही फर्टिलाइजर भी आता है। अगर इसकी समय पर और समुचित मात्रा में सप्लाई नहीं हो पाई तो किसान संकट में पड़ जाएंगे। इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा।