अमेरिका-ईरान के बीच टूटा युद्धविराम, यूएस ने किए हवाई हमले

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम अब पूरी तरह टूट गया।   अमेरिकी सेना ने अपने दो अपाचे हेलीकॉप्टरों के गिराए जाने के बाद ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी हमले किए। इन हमलों का टारगेट दक्षिणी ईरान का वह इलाका रहा जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित है।
ट्रंप ने किया बड़ा दावा 


अप्रैल से चल रहे युद्धविराम के बाद अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने आ गए हैं। इस बार युद्ध की शुरुआत तब हुई जब मंगलवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान ने अमेरिका का अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया गया। जिसके दोनों पायलट्स को सी-ड्रोन्स की मदद से रेस्क्यू किया गया है। दूसरी ईरान ने अमेरिका के दावों को नकारते हुए कहा कि यह हमला उसके देश और सेना द्वारा नहीं किया गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद रवांची सामने आए। उन्होंने विदेशी मीडिया अल जजीरा को बताया है कि होर्मुज के ऊपर अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर पर हुए हमले के पीछे तेहरान का हाथ नहीं है। वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज में कोई आक्रामक हवाई सैन्य अभियान नहीं चलाया गया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटना की आड़ में फिर दुश्मनी शुरू करने की कोशिश कर रहा है। जिसका हर स्थिति में निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ऐसे में कहा जा सकता है कि ईरान की सफाई के बाद भी दोनों देशों में ठन गई। 
मानव रहित समुद्री जहाज का प्रयोग


अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने इतिहास में पहली बार किसी मानव रहित समुद्री जहाज का इस्तेमाल समुद्र में फंसे जवानों को बचाने के लिए किया है। अमेरिकी नौसेना ने इस रेस्क्यू आॅपरेशन को अंजाम देने के लिए जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया है, इसका नाम सैरोनिक कॉर्सियर है। ये ड्रोन लगभग 24 फीट (7.3 मीटर) लंबा एक आॅटोनॉमस समुद्री जहाज है। बता दें कि पेंटागन पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ मानव रहित ड्रोन के इस्तेमाल को लगातार बढ़ा रही है। ये ड्रोन उसी अमेरिकी मिशन का हिस्सा है। अपने पायलट को बचाने के बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी हमले किए। इन हमलों का टारगेट दक्षिणी ईरान का वह इलाका रहा जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया। हमलों की सबसे ज्यादा खबरें होर्मोजगान प्रांत से सामने आईं। ईरानी मीडिया के मुताबिक केशम द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक और जास्क में जोरदार विस्फोट हुए। केशम द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं।  
होर्मुज स्ट्रेट के तैनात ईरानी रडार 


अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों का मुख्य लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तैनात ईरानी रडार और वायु रक्षा नेटवर्क थे। माना जा रहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र में ईरान की निगरानी और सैन्य क्षमता को कमजोर करना चाहता है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने झूठे बहाने बनाकर जास्क, सीरिक में कई स्थानों को निशाना बनाया। हमलों में एक टेलीकम्युनिकेशन टावर को नुकसान पहुंचा है जबकि शहर के दो पानी के टैंक भी नष्ट हो गए। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की। आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी आक्रामकता जारी रही तो उसका जवाब और बड़ा होगा।