भारत बनाएगा सुपर मिसाइल, पानी मांगेगे दुनिया भर के एयर डिफेंस सिस्टम

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत के रक्षा वैज्ञानिक अब नई तकनीक पर काम करे हैं। यह कोई आम प्रोजेक्ट नहीं है। इस खास प्रोजेक्ट के तहत ऐसी मिसाइल का निर्माण होगा जो एयर डिफेंस किलर मिसाइल होगी। यानी इसके सामने दुनिया भर के एयर डिफेंस सिस्टम पानी मांगेगे। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भारत का कोई भी दुश्मन सुरक्षित नहीं रहेगा।
युद्ध का तरीका बदल रहा है दुनिया का हर देश 

आज युद्ध का तरीका बदल रहा है। दुनिया का हर देश अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में लगा हुआ है। अमेरिका से लेकर इजरायल तक काम में लगे हुए हैं। अब भारत ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। भारत के रक्षा वैज्ञानिक ऐसी मिसाइल का विकास कर रहे हैं जिसके सामने दुनिया हर एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम हो जाएगा। इस मिसाइल को एयर डिफेंस किलर मिसाइल बताया जा रहा है। य मिसाइल अमेरिका के थॉड, रूस के एस-500 जैसे बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने में सक्षम होगी।  साथ ही  की एचक्यू-19 जैसी आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा सिस्टम्स भी इसे रोकने में अक्षम होगी। यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भारत का कोई भी दुश्मन देश सुरक्षित नहीं रहेगा। खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को भविष्य में किसी भी तरह का दुस्साहस करने से पहले अनेकों बार सोचना पड़ेगा। इस खास प्रोजेक्ट के बारे फिलहाल रक्षा मंत्रालय या डीआरडीओ ने कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है लेकिन पता चला है कि वैज्ञानिकों ने इससे जुड़ी तैयारियां पूरी कर रखी हैं। रक्षा जानकारों के अनुसार भारत की अगली पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल आईसीबीएम अग्नि-6 को आधुनिक  बनाया जाएगा। इसे आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने और उन्हें चकमा देने की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है। बता दे कि पिछले एक दशक में वैश्विक सामरिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ऐसे में दुनिया की बड़ी परमाणु शक्तियां अब केवल लंबी दूरी और अधिक पेलोड पर नहीं, बल्कि मिसाइल की सटीकता और गति पर ध्यान दे रही हैं। भारत का प्रस्तावित अग्नि-6 प्रोग्राम भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 
इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की रिपोर्ट 

इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि अग्नि-6 के विकास में डीआरडीओ ने मिशन दिव्यास्त्र और मल्टीपल एमआईआरवी तकनीक से जुड़े ट्रायल के अनुभव को आधार बनाया है। बता दें िक पहले बैलिस्टिक मिसाइलें मुख्य रूप से गति, ऊंचाई और वॉरहेड डिलीवरी की विश्वसनीयता पर निर्भर थीं। अब समय बदल चुका है। आधुनिक समय में ऐसी मिसाइलों पर जोर दिया जा रहा है जो दुश्मन के रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम को भ्रमित करके बच निकलने में सक्षम हो। सूत्रों के अनुसार आईसीबीएम अग्नि-6 भविष्य में 10 से 12 स्वतंत्र रूप से लक्ष्य भेदने वाले वॉरहेड ले जाने में सक्षम हो सकती है। यह वर्तमान अग्नि-6 से कहीं अधिक एडवांस क्षमता होगी। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा कि नई मिसाइल अग्नि-6 की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी छलांग केवल एमआईआरवी नहीं होगी। इसे इस बार एमएआरवी तकनीक के साथ विकसित किया जा रहा है। बता दें कि एमएआरवी का मतलब मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक है। इस तकनीक से लैस होने वाली मिसाइल  दिशा बदलने, तेज मोड़ लेने में सक्षम होगी। इसकी रफ्तार हाइपरसोनिक गति यानी मैक-20 से अधिक होगी। इसके अलावा इसमें एडवांस पेनीट्रेशन एड्स यानी पेनएड्स तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य दुश्मन के रडार और ट्रैकिंग सिस्टम को भ्रमित करना होगा। इसकी संभावित मारक क्षमता 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। इससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ जागएा जिनके पास आधुनिक परमाणु संघर्ष के लिए तैयार उन्नत रणनीतिक मिसाइल प्रणाली मौजूद है।