आप में बगावत के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल, गिर सकती है सरकार

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। आप में बगावत के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। सात सांसदों का पार्टी छोड़ना सिर्फ़ दिल्ली में झटका नहीं है, बल्कि पंजाब में भी बड़ा असर पड़ने वाला है कयास लगाए जा रहे हैं कि वहां भी सरकार गिर सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 50 प्रतिशत से ज्यादा विधायक इन बागियों के साथ हैं।
आप में उलटफेर के संकेत
आम आदमी पार्टी में बगावत के बाद पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने वाला है। विधानसभा चुनाव से करीब नौ महीने पहले हुए इस घटनाक्रम से सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। बता दें कि कल यानी 25 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ी टूट हुई है। आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से छह सांसद पंजाब कोटे से हैं जबकि एक दिल्ली से जुड़ी हैं। इस घटनाक्रम से भाजपा को जहां राजनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद है वहीं आप के सामने संगठन को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बगावत करने वालों में सांसदों की बात करें तो इनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह और संदीप पाठक का नाम है। वही विक्रमजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं जबकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं। वर्तमान में पंजाब में आप की सरकार है। 
भाजपा में शामिल हुए सांसद

भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों की लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम संदीप पाठक का रहा। आम आदमी पार्टी में पाठक ऐसे नेता थे जो बीजेपी के खिलाफ सबसे मुखर आवाजों में से एक रहे हैं। स्वभाव से पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले पाठक ने 2022 से एक सख्त संगठनात्मक व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। संदीप पाठक सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक रणनीति जानते थे। पाठक आंकड़ों, सर्वेक्षणों और क्रियान्वयन के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। इसका मतलब है कि वे कभी केजरीवाल के चाणक्य या आप के अमित शाह थे।
सांसदों के पार्टी छोड़ने का असर

सात सांसदों के पार्टी छोड़ने का पंजाब में तगड़ा असर पड़ सकता है। आप नेतृत्व को इस बात की चिंता है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक पंजाब में गहरी संगठनात्मक भूमिका निभा चुके हैं। 2022 के चुनावों से पहले उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुने जाने तक इनका काफी असर रहा। आप के लगभग 50 प्रतिशत विधायक मानते हैं कि राघव चड्ढा या संदीप पाठक को वजह से ही पिछले चुनाव में इन्हें टिकट मिला था। यानी इससे एक बात साफ है कि ये 50 प्रतिशत विधायक इन बागी सांसदों के साथ सीधे संपर्क में हैं। आप के कई विधायक पंजाब में भगवंत मान सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। ये सभी सरकार गिराने की कवायद शुरू कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बंगाल चुनाव परिणामों के बाद यहां भी खेला हो सकता है। 
पार्टी के अंदर बातचीत की कमी पर जोर

आनंदपुर साहिब के सांसद मलविंदर कांग ने भी पार्टी के अंदर बातचीत की कमी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संदीप पाठक ने मुझे बताया कि पिछले एक साल में किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया। एक विधायक ने कहा कि हमें अपने लोकसभा सांसदों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। उन्हें लुभाने की कोशिश हो सकती है। बता दें कि पंजाब से आप के लोकसभा में तीन सांसद हैं। इनमें मलविंदर सिंह कांग, राज कुमार चब्बेवाल और गुरमीत सिंह मीत हेयर शामिल हैं। दूसरी ओर कयास यह भी लगाए जा रहे हैं दिल्ली में कुछ विधायक भी इन बागियों के संपर्क में है। ऐसे में आप नेतृत्व के सामने कई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। इनमें तुरंत होने वाली टूट को रोकना ह और पार्टी के लोगों को विद्रोही होने से रोकना है।