मिसाइल से 39 गुना सस्ते रॉकेट से ड्रोन के उड़ जाएंगे परखच्चे 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। फ्रांस ने अपने राफेल लड़ाकू विमानों में एलएडीसी प्रोग्राम के तहत 68 एमएम के लेजर-गाइडेड रॉकेट को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किया है। यह कदम भारत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसा करने से अब लड़ाकू विमान में 19 करोड़ की मिसाइल की जरूरत नहीं होगी। उससे 39 गुना सस्ता रॉकेट ही ड्रोन के परखच्चे उड़ा देगा।
बेहद सस्ते ड्रोन ने मचाई तबाही 
रूस-यूक्रेन जंग के दौरान जब बेहद सस्ते ड्रोन ने तबाही मचाई तो पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर गया। इससे दुनियाभर की वायुसेनाओं के सामने अजीब और बेहद महंगा संकट खड़ा हो गया। संकट यह है कि महज  48 लाख रुपये के एक ड्रोन को मार गिराने के लिए 19 करोड़ रुपये की मिसाइल को दागना कहां तक उचित है। ऐसे में फ्रांस ने इसकी काट निकाल ली। फ्रांस ने अपने सबसे घातक लड़ाकू विमान राफेल को एक नए और बेहद सस्ते हथियार से लैस कर दिया है। अब जिस मिसाइल को इसमें सेट किया गया है उसकी कीमत 30 लाख से 4 लाख के बीच बैठती है। इसका मतलब है कि अब मिसाइल के मुकालबे 39 गुना सस्ते रॉकेट से इन ड्रोनों को मार गिराया जाएगा।  
68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट 


रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस ने अपने उन्नत लड़ाकू विमान राफेल में 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट को जोड़ने में सफलता हासिल की है। कम कीमत वाले इस हथियार को ड्रोन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए विकसित किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बिना पायलट वाले हवाई खतरों के तेजी से बढ़ने के कारण वायु सेनाएं हवा से हवा में मार करने वाली महंगी मिसाइलों के सस्ते विकल्प तलाश रही हैं। इस कार्यक्रम को एलएडीएसी के नाम से जाना जाता है। इसे फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना को ड्रोन के खिलाफ एक सस्ती व असरदार क्षमता प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। फ्रांस के आयुध महानिदेशालय यानी डीजीए की तरफ से फ्रांसीसी मीडिया को जारी बयान के अनुसार, इस एकीकरण के काम को फ्रांसीस वायु एवं अंतरिक्ष बल के सेंटर डी एक्सपर्टीज एरियैन मिलिटेयर के साथ मिलकर किया गया। इसमें दासौ एविएशन और थेल्स का सहयोग मिला। द वॉर जोन टीडब्ल्यूजेड की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीए ने कहा कि लॉन्चर पॉड्स, लेजर गाइडेड रॉकेट और एलएडीएसी मोड वाले टैलोइस लेजर डेजिग्नेशन पॉड्स का पहला बैच जुलाई के आखिर से फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल को मिलना शुरू हो जाएगा।
ड्रोन अटैक का मुकाबला 


रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर 2025 में फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल के प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर ने ईरान के शाहेद-136 जैसे लंबी दूरी के एकतरफा अटैक ड्रोन का मुकाबला करने के लिए राफेल और मिराज 2000डी पर लेजर-गाइडेड रॉकेट लगाने का आदेश दिया था। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि एक फ्रांसीसी एमआईसीए मिसाइल की कीमत लगभग 20 लाख डॉलर है जबकि शाहेद ड्रोन की कीमत लगभग 50 हजार डॉलर है। राफेल के उन्नत होने का भारत को सीधा फायदा मिलेगा। बता दें कि अमेरिका पहले ही एफ-15ई, एफ-16 और ए-10 जैसे लड़ाकू विमानों में 70मिमी एपीकेडब्ल्यूएस लेजर  गाइडेड रॉकेट लगा चुका है। इनका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए किया गया।
फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का सौदा
भारत ने साल 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का सौदा किया था। ये सभी विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा चुके हैं। भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने फ्रांस को 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का अनुरोध भेजा है। मेक इन इंडिया के तहत इनमें से ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। ऐसे में इन लड़ाकू विमानों के उन्नतीकरण का भारत को बड़ा लाभ मिलने वाला है।