नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने मचाई भीषण तबाही, 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक लगभग 160 से ज्यादा लोेगों के मारे जाने की खबर है। वहीं 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में मानसरोवर यात्रा पर गए कमोबेश 140 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं।  नेपाल-चीन सीमा के करीब तिब्बत में आए भीषण बफीर्ले भूस्खलन और उसके बाद ग्लेशियर झील फटने से नेपाल में अचानक भयंकर जलप्रलय आ गई। 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे मलबे और पत्थरों से भरा सैलाब भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल में दाखिल हुआ। इसके बाद नदी ने रास्ते में आने वाले बाजारों, घरों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल-चीन सीमा से सटा रसुवागढ़ी-टिमुरे कॉरिडोर सबसे पहले इस सैलाब की बड़ी चपेट में आया। तिब्बत की तरफ से आया पानी, पत्थर और मलबा यहां बेहद तेज रफ्तार से पहुंचा। ऐतिहासिक मितेरी फ्रेंडशिप ब्रिज भी इसकी चपेट में आकर नदी में बह गया। टिमुरे का सीमा शुल्क कार्यालय मलबे में दब गया, जबकि चीन से आयात होकर आए कई इलेक्ट्रिक वाहन और कंटेनर ट्रक भी मलबे के साथ बह गए। यह इलाका नेपाल-चीन व्यापार के लिए बेहद अहम है, इसलिए यहां का नुकसान आर्थिक तौर पर भी बड़ा झटका है। 
भोटेकोशी नदी में बड़ा हादसा

बता दें कि स्याफ्रुबेसी बाजार भोटेकोशी नदी के किनारे बसा प्रमुख पहाड़ी कस्बा है। लांगटांग ट्रैकिंग और पर्यटन के लिए मशहूर इस इलाके में अचानक आए तेज बहाव ने भारी तबाही मचाई। पानी और बड़े-बड़े बोल्डर्स के दबाव से 60 से ज्यादा बहुमंजिला होटल, लॉज और पक्के मकान ढह गए। कई इमारतें सीधे नदी में समा गई। भूस्खलन के कारण सेना का मुख्य हेलीपैड भी प्रभावित हुआ, जिससे राहत और बचाव अभियान मुश्किल हो गया।  भोटेकोशी का पानी आगे बढ़कर त्रिशूली नदी तंत्र में मिला और इसके बाद नुवाकोट के त्रिशूली बाजार और बेत्रावती इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए।  बता दें कि बुधवार तड़के अचानक नेपाल की भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा। उसके बाद उसने बाढ़ का रूप ले लिया। देखते ही देखते कई पुल, प्रोजेक्ट्स और इमारतें भरभरा कर गिरने लगीं। पुलिस अलग-अलग जिलों में बाढ़ की चपेट में आने वाले घरों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गई। फिलहाल मौजूदा समय में विभिन्न एजेंसियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर जरूरी बचाव और खोज अभियान चला रही है, और कई जगहों पर रास्ते की रुकावटें हटा रही है।
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक करीब 157 शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल में घर, सड़कें और बिजली परियोजनाएं बाढ़ में बह गईं। आपदा के कारण बिजली कट गई। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल फोन की रोशनी में लापता लोगों के नाम दर्ज किए। काठमांडू के पर्यटन अधिकारियों के मुताबिक, करीब 400 पर्यटक लापता हैं। इनमें करीब 340 विदेशी नागरिक हैं। काठमांडू हवाई अड्डे से 49 बचाव उड़ानें भरी गईं। आरसीसी कार्यालय के अनुसार, बुधवार शाम 5:20 बजे तक निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों ने धुंचे, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, मैलुंग, त्रिशूली और धाडिंग इलाकों में बचाव और राहत पहुंचाने के लिए उड़ान भरी। वहीं, इस विपत्ति में भारत ने पड़ोसी देश की हर मुमकिन मदद का आश्वासन दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
हादसा कैसे हुआ?
सबसे बड़ी बात यह है कि आखिरकार यह हादसा कैसे हुआ यह सवाल अनुत्तिरित है।  नेपाल की भीषण बाढ़ ने जो विनाश किया है, उसके बाद ये देश सदमे में है। ऐतिहासिक नुकसान झेल रहा नेपाल अब तक ये पता लगाने में जुटा है कि आखिर ये आपदा आई कैसे? बता दें कि 5 मंजिल से भी ऊंची सुनामी जैसी लहरें लिए भोटेकोशी नदी आई और तिनके की तरह सबकुछ बहा ले गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार नेपाल और तिब्बत में हुई विनाशकारी घटना के पीछे भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर का अचानक टूटना मुख्य कारण था। वैज्ञानिकों के अनुसार जिस भूकंपीय गतिविधि को शुरूआत में भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के टूटने और उसके साथ मलबे के तेज बहाव के कारण हुई थी। ग्लेशियर टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहा।  इससे निचले इलाकों में बेहद गंभीर और विनाशकारी स्थिति पैदा हो गई. तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले इलाकों को प्रभावित किया और बाढ़ तथा भूस्खलन जैसी स्थिति पैदा हुई।