जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। ईरान को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर गंभीर चेतावनी दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि देखते रहिए आज इन पागलों के साथ क्या होता है। अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने लिखा कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, वायुसेना भी अब नहीं रही और उसके मिसाइल, ड्रोन व अन्य सैन्य संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के कई नेता भी मारे जा चुके हैं।
खामेनेई ने हमले जारी रखने का जताया संकल्प
ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता का पद संभालने के बाद पहला बयान जारी कर कहा कि ईरान खाड़ी देशों पर हमले जारी रखेगा साथ ही उन्होंने उस युद्ध में अन्य मोर्चे खोलने की धमकी दी जिसने पहले ही विश्व ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को बाधित कर दिया है। इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खामेनेई को रेवोल्यूशनी गॉर्ड्स की कठपुतली करार देते हुए उनकी निंदा की। नेतन्याहू ने कहा कि उनके देश के हमले ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं, जिनसे ईरान की जनता सरकार को उखाड़ फेंक सके। नेतन्याहू ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह आपके हाथों में है। हम शासन के पतन के लिए अनुकूलतम परिस्थितियां बना रहे हैं। अमेरिका स्थित स्वतंत्र निगरानी समूह आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (एसीएलईडी) के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल ने ईरान में सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाया है ताकि विरोध को दबाने की सरकार की क्षमता को कमजोर किया जा सके।
नेतन्याहू ने बताया रेवोल्यूशनी गॉर्ड्स की कठपुतली
मोजतबा खामेनेई के ईरान के अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से करीबी संबंध हैं और ऐसा माना जाता है कि उनका रुख अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई से भी अधिक कट्टर है। अभी यह जानकारी नहीं है कि वह कहां हैं। सरकारी टेलीविजन पर शीर्ष नेता खामेनेई (56) का बयान एक समाचार प्रस्तोता ने पढ़ा। खामेनेई कैमरे के सामने नहीं आए और इजराइली आकलन से पता चलता है कि युद्ध की शुरूआती गोलीबारी में वह घायल हो गए थे। उन्होंने युद्ध में मारे गए लोगों का बदला लेने का संकल्प जताया। इस बयान से उस युद्ध को जारी रखने की इच्छा का संकेत मिलता है जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और खाड़ी के अरब देशों को प्राप्त सुरक्षा को बाधित किया है और जिसने ईरान के नेतृत्व, सैन्य और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी काफी असर डाला है। युद्ध शुरू होने के बाद से खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। ईरान के साथ युद्ध को लेकर चिंताओं के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़कर 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं और दुनिया भर के शेयर बाजार में गिरावट आई। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह खाड़ी अरब के अपने पड़ोसियों पर हमले जारी रखेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के रणनीतिक लाभ का इस्तेमाल अमेरिका एवं इजराइल के खिलाफ दबाव बनाने के लिए करेगा। ट्यूनीशिया में ईरान के राजदूत मीर मसूद होसैनियन ने बृहस्पतिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरानी नौसैनिक बलों ने जलडमरूमध्य पर ह्यह्यपूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। और ह्यह्यहमारी तेल अवसंरचना पर हमलों के जवाब में सटीक हमले किएहैं। दुनियाभर में जितने तेल का कारोबार होता है, उसका पांचवां हिस्सा फारस की खाड़ी से हिंद महासागर की ओर जाने वाले इस जलमार्ग से ही गुजरता है। उन्होंने कहा, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा ईरान की संप्रभुता के सम्मान पर निर्भर है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने की घोषणा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि वह ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बीच रूसी तेल पर प्रतिबंधों में और ढील देने के लिए कदम उठा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने अन्य देशों को इस समय समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अस्थायी अनुमति दिए जाने की घोषणा की है। अमेरिका ने इससे पहले भारत को भी प्रतिबंधों से इसी तरह की छूट दी थी ताकि वह रूसी तेल खरीद सके। यह कदम 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बढ़ रही तेल कीमतों को कम करने के प्रयासों के तहत उठाया गया। इस बीच, होसैनियन ने द एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि नए सर्वोच्च नेता अपने घर पर हुए हमले में घायल हुए थे लेकिन उनकी स्थिति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह होने वाली ईद की उस नमाज में संभवत: शामिल होंगे जिसकी अगुवाई परंपरागत रूप से उनके पिता किया करते थे। होसैनियन ने कहा कि ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले रणनीतिक कारणों से किए। खामेनेई ने खाड़ी अरब देशों से क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने बंद करने का आह्वान करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन झूठ के सिवा कुछ नहीं हैं। इस बीच, ट्रंप ने काम पूरा करने का वादा किया है। उन्होंने दावा किया है कि ईरान लगभग पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि ईरान में युद्ध के कारण लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।





