अमेरिका, इरायल और ईरान युद्ध पर बड़ा बयान, ईरान अपना रुख बदले तो हम युद्ध समाप्त करने को तैयार

जनप्रवाद टीम। भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने सोमवार को कहा कि अगर ईरान अपना रुख बदलता है तो हम युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सोमवार को 17वां दिन है। अजार ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों में इजराइल ने कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत की और अमेरिका तथा क्षेत्र के अन्य देशों में अपने साझेदारों से भी परामर्श किया। उन्होंने कहा कि इस परामर्श में वह देश भी शामिल थे, जिनके साथ इजराइल के राजनयिक संबंध नहीं हैं।
कूटनीति का पक्षधर रहा इजरायल

उन्होंने कहा, हम हमेशा कूटनीति के पक्षधर हैं। दुर्भाग्य से, कूटनीति के इतने प्रयास विफल हो गए कि हमें सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। हमें उम्मीद है कि हमारी सैन्य कार्रवाई के परिणामस्वरूप कूटनीति फिर से प्रासंगिक हो जाएगी। अजार ने यह भी कहा कि सैन्य कार्रवाई के माध्यम से, हमने ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया है। अजार ने पत्रकारों से कहा, इस समय हम ईरान के हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण कर रहे हैं। ईरान बेहद मुश्किल स्थिति में है। उन्होंने कहा, अगर ईरान अपना रुख बदलता है और इजराइल को मान्यता देता है तो भविष्य उज्ज्वल होगा।
सस्ते सामान की तलाश में इराक पहुंचे दर्जनों ईरानी

 

युद्ध के कारण लंबे समय से बंद रही सीमा खुलने के बाद रविवार को दर्जनों ईरानी नागरिक सस्ती खाद्य सामग्री खरीदने, इंटरनेट का उपयोग करने, परिजनों से संपर्क साधने और काम की तलाश में उत्तरी इराक में दाखिल हुए। यात्रियों ने बताया कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने ईरान में जीवन बेहद कठिन बना दिया है। इराक के कुर्द क्षेत्र से माल से लदे ट्रक हाजी ओमेरान सीमा चौकी के रास्ते ईरान की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे ईरान में बढ़ती कीमतों से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरानी कुर्द अक्सर इराकी कुर्दिस्तान में आते-जाते रहे हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध गहरे हैं तथा खुली सीमा के कारण व्यापार और आवागमन नियमित रहा है। अब युद्धग्रस्त क्षेत्र में ईरानियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का अहम जरिया इराक का कुर्द क्षेत्र बन गया है। ईरान की ओर सामान लेकर जा रहे ट्रक चालक खिदेर चोमानी ने कहा, जब यह सीमा बंद थी, तब इसका असर गरीबों, अमीरों और मजदूरों सभी पर पड़ा। क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने के बाद इस सीमा को बंद कर दिया गया था। इराकी कुर्द प्रशासन लंबे समय से अपने ईरानी समकक्षों द्वारा इसे फिर से खोलने का इंतजार कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि कई ईरानी सैन्य ठिकाने, खुफिया कार्यालय और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान हमलों में नष्ट हो गए हैं। बमबारी के कारण सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं।