नया अध्याय लिखेगा गंगा एक्सप्रेस वे, 594 किमी लंबा मार्ग अब यूपी की शान 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। गंगा एक्सप्रेस वे विकास का नया अध्याय लिखने जा रहा है। 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे अब यूपी की शान बनेगा। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर गंगा एक्सप्रेस-वे क्या खासियत है। इसके निर्माण से जुड़ा इतिहास क्या है? इसका आर्थिक और राजनीतिक महत्व कितना ज्यादा है? 
पूर्वी से जुडेगा पश्चिमी यूपी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा, 6-लेन (जिसे 8-लेन तक बढ़ाया जा सकता है) वाला, एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफ़ील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसे लगभग 36,230 करोड़ रुपये की कुल लागत से बनाया गया है। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट की सड़क नहीं है, बल्कि योगी सरकार का वो ब्रह्मास्त्र है जिसने पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से सीधे जोड़ दिया है। मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है। बता दें कि उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है। नोएडा और आगरा के बीच बने एक्सप्रेस-वे के बाद से राज्य में अब तक पांच एक्सप्रेस-वे अस्तित्व में आ चुके हैं। अब गंगा एक्सप्रेस-वे को यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता के रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है। 
गंगा

एक्सप्रेस-वे की नींव योगी सरकार के कार्यकाल में 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से रखी गई थी। गंगा एक्सप्रेस-वे का विचार पहली बार 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से प्रस्तावित किया गया था। इसे शुरूआत में ग्रेटर नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे के तौर पर पहचान मिली। गंगा नदी के किनारे इसकी निर्माण योजना होने की वजह से इसे पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां नहीं मिल पाईं और यह परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। करीब 12 साल तक इस प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा तक नहीं हुई। इस बीच अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने नोएडा-आगरा एक्सप्रेस-वे को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया।  29 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को पुनर्जीवित किया। पर्यावरण के मानकों को पूरा करने के लिए, नए एक्सप्रेस-वे को गंगा नदी से 10 किलोमीटर की दूरी पर लगभग समानांतर बनाने की योजना तैयार की गई। 2020 में चरण-1 (मेरठ से प्रयागराज) के निर्माण के लिए दो हजार करोड़ रुपये का पहला बजट आवंटित किया गया। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया। अगस्त 2021 तक 90 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया। नवंबर 2021 में इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल गई। यूपी कैबिनेट ने इसके लिए 36,230 करोड़ का बजट स्वीकृत किया। 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी।
खासियतों से भरा है यह एक्सप्रेस वे 

यह एक्सप्रेस वे खासियतों से भरा हुआ है। 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में 14 लंबे पुल, जिसमें हापुड़ में गंगा नदी पर 900 मीटर और बदायूं में रामगंगा पर 720 मीटर लंबा पुल शामिल हैं। इसके अलावा सात रेलवे ओवरब्रिज, 32 फ्लाईओवर और 453 अंडरपास शामिल हैं। गंगा एक्सप्रेस-वे भारत के सबसे लंबे और आधुनिक एक्सप्रेस-वे में से एक है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसका सैन्य और आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। शाहजहांपुर के जलालाबाद में एक्सप्रेस-वे पर 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी बनाई गई है। यह देश की पहली ऐसी हवाई पट्टी है जहां भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान दिन और रात दोनों समय सुरक्षित लैंडिंग और टेकआॅफ कर सकते हैं। बता दें कि बीते साल इस हवाई पट्टी पर राफेल, सुखोई 30-एमकेआई, मिराज-2000, एएन-32 और एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर की लैंडिंग और टेकआॅफ का परीक्षण किया गया था।  वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। निगरानी-सुरक्षा के लिए पूरे एक्सप्रेस-वे पर सीसीटीवी और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित किया गया है। वाहन चालकों की नींद और थकान दूर करने के लिए किनारे पर रंबल स्ट्रिप्स लगाई गई हैं, जो कंपन पैदा कर चालकों को सचेत करेंगी और हादसों का खतरा कम करेंगी। इसके दोनों ओर गंगा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिसमें आईटी पार्क, फार्मा पार्क और टेक्सटाइल पार्क बनेंगे, जिससे रोजगार और व्यापार को भारी बढ़ावा मिलेगा। दावा किया जा रहा है कि इसके शुरू होने से देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी।