जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। ब्रह्मांड का हर राज अब दुनिया के सामने होगा। पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर तक अंतरिक्ष की हर घटना रिकॉर्ड होगी। चाहे वह डार्क मैटर हो या डार्क एनर्जी सब कुछ वैज्ञानिकों की नजर में होगा। यहां तक कि अब नए ग्रहों की खोज भी आसान होगी। यह सब नासा के आज तक के सबसे ताकतवर टेलीस्कोप की मदद से संभव होगा।
नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का अनावरण
ब्रह्मांड की खोज के क्षेत्र में खगोलशास्त्री और वैज्ञानिक अब बड़ी छलांग लगाने वाले हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का अनावरण किया है। यह एक खास तरह का टेलीस्कोप है, जो सौर मंडल के बाह्य ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की खोज करेगा। इस टेलीस्कोप की सबसे खास बात इसका विशाल व्यू एरिया है। ये हबल टेलीस्कोप के मुकाबले एक बार में 100 गुना ज्यादा क्षेत्र की तस्वीरें ले सकता है। जिससे रिसर्च क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। बता दें कि भले ही ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना है, लेकिन यह तत्व आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। रोमन टेलीस्कोप इन इंविसिबल एलिमेंट्स के प्रभाव को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा। ये टेलीस्कोप हमारे सौर मंडल से बाहर मौजूद एक्सोप्लैनेट्स की खोज करेगा। इस टेलीस्कोप की खास बात यह है कि इसमें लगी तकनीक बेहद शक्तिशाली है। यह तारों की रोशनी को ब्लॉक कर सीधे ग्रहों को देख सकेगा।
जेरेड इसाकमैन ने मैरीलैंड ने दी जानकारी
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने मैरीलैंड के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसके बारे में अन्य जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि रोमन टेलीस्कोप पृथ्वी को ब्रह्मांड का एक नया नक्शा देगा। 12 मीटर लंबा यह सिल्वर रंग का टेलीस्कोप बड़े सोलर पैनल के साथ बनाया गया है। इसे सितंबर में स्पेसएक्स के रॉकेट से फ्लोरिडा से लॉन्च किया जा सकता है। इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। बता दें कि नैन्सी ग्रेस रोमन को हबल स्पेस टेलीस्कोप की मां यानी जन्मदाता कहा जाता है। नासा के अनुसार रोमन का सबसे खास हिस्सा उसका वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट है, जो 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा है। यह इतना ताकतवर है कि अपने पूरे लाइफटाइम में यह 1 अरब गैलेक्सियों की फोटो लेगा। यह हबल साफ तस्वीरें तो लेता ही है, साथ ही एक बार में आसमान का 100 गुना बड़ा हिस्सा कवर करता है।। इसी वजह से, सिर्फ 5 साल में रोमन उतना क्षेत्र देख लेगा जो हबल ने 30 साल में भी नहीं देख पाया होगा। यह अपने जीवनकाल में एक अरब आकाशगंगाओं की रोशनी को माप सकता है, साथ ही यह हमारी गैलेक्सी में ग्रहों की संख्या और प्रकार का बड़ा डेटा तैयार करेगा।
महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोज पाएंगे
इस टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिक एक्सोप्लैनेट और इन्फ्रारेड एस्ट्रोफिजिक्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोज पाएंगे। नासा के अनुसार रोमन टेलीस्कोप को बनाने में 10 साल से ज्यादा समय लगा। साथ ही 4 अरब डॉलर से अधिक की लागत आई है। इसे पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इससे ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का अध्ययन करना आसान हो जाएगा। इसे अंतरिक्ष के एक खास स्थान, दूसरे सन-अर्थ लाग्रांज पॉइंट यानी एल2 पर रखा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित रहता है। यहां वस्तुएं कम ऊर्जा में स्थिर कक्षा में बनी रह सकती हैं। एल2 पर मौजूद रहने से टेलीस्कोप को तापमान स्थिरता मिलेगी, जिससे हबल की तुलना में डेटा की गुणवत्ता लगभग 10 गुना बेहतर होगी। गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के सिस्टम इंजीनियर मार्क मेल्टन का मानना है कि यह टेलीस्कोप हर दिन करीब 11 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजेगा। इस कैमरे की मदद से ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का 3डी मैप तैयार किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि अरबों साल में हमारा ब्रह्मांड कैसे बदला है। यह सुपरनोवा, गैलेक्सी के समूह और लाखों गैलेक्सियों की रोशनी को स्टडी करेगा। इससे ब्रह्मांड की उम्र जानने का एक खास क्लू मिलेगा।





