जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। लद्दाख में चीन को डराने और आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की चौकियों को तबाह करने वाली के-9 बज्र तोपों का बेड़ा अब और ताकतवर होगा। भारत सरकार ने इसकी 200 और यूनिट खरीदने का फैसला किया है। इससे एलओसी से लेकर एलएसी तक दुश्मन भारत पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा।
के-9 वज्र अब और भी होगी आधुनिक
दुनिया में सबसे ताकतवर तोपों में गिनी जानी वाली के-9 वज्र अब और भी आधुनिक होगी। यह दक्षिण कोरिया के के9 थंडर का भारतीय रूप है। यह 155 एमएम की तोप है। इसकी मारक क्षमता 50 किलोमीटर से ज्यादा है। बता दें कि साल 2020 में जब चीन से साथ पूर्वी लद्दाख में टकराव हुआ था तब भारत ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया था। भारतीय सेना ने चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी से सटे लद्दाख सेक्टर के अग्रिम इलाकों में के-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपें तैनात कर दी थीं। चीन इस कदम से चौंक गया था। इस तोप को देखकर ही पीएलए की सेना आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर सकी थी। अब भारत इस खास तोप की 200 अतिरिक्त यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है। इसके अलावा के-9 को और खतरनाक बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें दक्षिण कोरिया का सहयोग लिया जाएगा। बता दें कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान इस पर बात हुई है। विदेश मंत्रालय के सचिव पी कुमार ने इस बारे में कहा कि दक्षिण कोरिया भारत को के9 वज्र और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम दे चुका है। अब तक इसकी सप्लाई दो चरणों में पूरी हो चुकी है। अब तीसरे चरण पर बातचीत चल रही है। इस बार सिर्फ खरीद पर ध्यान नहीं है बल्कि तकनीक के ट्रांसफर पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
दुश्मन के हमलों का करारा जवाब देने में सक्षम
55 एमएम की इस स्वचालित तोप को दक्षिण कोरिया की कंपनी हनवहा एयरोस्पेस बनाती है। वहीं भारत में इसे दक्षिण कोरिया के सहयोग से लार्सन एंड ट्रूबो कंपनी बनाती है। यह 8़8 व्हील्ड तोप युद्ध के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह दुश्मन के हमलों का करारा जवाब देने में सक्षम है। साथ ही ड्रोन अटैक को भी रोकती है। इसको शक्तिशाली बनाने से दुश्मन के पलटवार पर यह तोप आसानी से अपना बचाव कर सकेगी। इस बदलाव के तहत के9 तोप की रेंज को 50 से बढ़ाकर 54 किमी तक करने की तैयारी है। इससे यह आसानी से लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम हो जाएगी। भारत ने अब दक्षिण कोरिया से 200 के9 वज्र तोपों की खरीद करेगा। इस अपग्रेड के बाद के-9 तोप की मदद से लंबी दूरी तक न केवल हमला किया जा सकेगा बल्कि लॉजिस्टिक्स फुटप्रिंट को भी छिपाया जा सकेगा।
फायर कंट्रोल के लिए अत्याधुनिक सिस्टम लगा
भारत के अलावा नाटो देश भी अब लंबी दूरी तक हमला करने वाली तोपों पर फोकस कर रहे हैं। यही वजह है कि दक्षिण कोरिया भी इसकी रेंज को बढ़ाने पर काम कर रहा है। नए के-9 तोप में दक्षिण कोरिया फायर कंट्रोल के लिए अत्याधुनिक सिस्टम लगा रहा है। इसके अलावा सटीक हमला करने के लिए नई तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। इससे यह तोप अब बहुत कम समय में अत्याधिक तेजी से गोले दागने में सक्षम हो जाएगी। दक्षिण कोरियाई कंपनी हनवा का कहना है कि इस मॉडल में फुली आटोलोडर और संशोधित गन को लगाया गया है।
लेजर बीम वार्निंग सिस्टम लगाया
रक्षा वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार इस नई तोप को चलाने के लिए केवल 3 लोगों कमांडर, गनर और ड्राइवर की जरूरत होगी। इसके अलावा 8 गोले उसकी मैगजीन में रहेंगे। इसमें एक लेजर बीम वार्निंग सिस्टम लगाया जाएगा। के 9 तोप में ड्रोन को जाम करने के लिए भी जैमर लगाया जाएगा ताकि वे हमला न कर सकें। सबसे अहम बात यह है कि यह तोप लद्दाख की भीषण ठंड से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान में काम करने में सक्षम है। यह तोप मात्र 15 सेकंड में 3 गोले दागने में सक्षम है। इसका एक गोला 47 किलोग्राम का होता है।





