मप्र सरकार ने त्विषा शर्मा मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की

भोपाल, एजेंसी। मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले सप्ताह अपने ससुराल में फांसी पर लटकी मिली पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की सिफारिश की है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मध्यप्रदेश के गृह विभाग की ओर से इस संबंध में केंद्र को लिखे गए पत्र में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में वर्णित शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रकरण का अनुसंधान राज्य में करने के संबंध में अपनी सहमति प्रदान करती है। त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में मृत पाई गई थी। उसके परिवार ने उसके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया, जबकि सिंह परिवार ने दावा किया कि वह ड्रग्स की आदी थी।
दहेज हत्या में केस दर्ज

पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास व पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (2), 85 और 3 (5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने फरार पति समर्थ की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 30,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है। इस बीच, इस मामले को लेकर मॉडल से अभिनेत्री बनी अभिनेत्री त्विषा शर्मा और पति समर्थ सिंह के परिवारों के बीच कानूनी लड़ाई भी छिड़ गई है। दोनों पक्षों ने इस मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया। समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत मांगी है, जबकि त्विषा के परिवार ने उनकी मां गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने का फैसला किया है। गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त जिला और सत्र न्यायाधीश और भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की वर्तमान अध्यक्ष हैं।
दोबारा पोस्टमार्टम के लिए हाईकोर्ट में याचिका

पिछले सप्ताह अपने ससुराल में फांसी पर लटकी मिली पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा के परिजनों ने उसके शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए शुक्रवार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया। त्विषा के परिजनों के वकील ने बताया कि दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए दायर की गई याचिका में पहले पोस्टमार्टम को चुनौती दी गई है और कहा गया है इसकी रिपोर्ट में बहुत सारी खामियां हैं। ज्ञात हो कि दो दिन पहले भोपाल की एक अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग वाली त्विषा के परिजनों की याचिका को खारिज कर दिया था। त्विषा के परिजनों के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने फोन पर 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि परिवार ने भोपाल के एम्स में हुए पहले पोस्टमार्टम में खामियों को बताते हुए दूसरे पोस्टमार्टम के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई आज दिन में होने की संभावना है। त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में मृत पाई गईं थीं। उसके परिवार ने उसके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया, जबकि सिंह परिवार ने दावा किया कि वह ड्रग्स की आदी थी। पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और सास व पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (2), 85 और 3 (5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने फरार पति समर्थ की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 30,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है। भोपाल में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुदिता गुप्ता ने बुधवार को संबंधित मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि सच्चाई तक पहुंचने के उद्देश्य से दोबारा पोस्टमॉर्टम की आवश्यकता है या नहीं, इस बारे में अदालत की अंतरात्मा संतुष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "प्रक्रिया के मामूली उल्लंघन अदालत को फिर से पोस्टमॉर्टम का आदेश देने के लिए प्रेरित नहीं करेंगे। त्विषा के शव का 13 मई को राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पोस्टमार्टम हुआ था और तभी से उसका शव वहां की मोर्चरी में रखा हुआ है। नोएडा निवासी ट्विशा के परिजन दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे हैं। भोपाल पुलिस ने पिछले दिनों त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि मृतका के शव का 13 मई को पोस्टमार्टम हुआ और वर्तमान में वह भोपाल स्थित एम्स के शवगृह में शून्य से नीचे चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा हुआ है। पुलिस ने एम्स के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि शव को सड़ने से बचाने के लिए शून्य से नीचे 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाना चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने बुधवार को अपने आदेश में कहा था कि पुलिस को एक पत्र जारी किया जाए, जिसमें उन्हें निर्देश दिया जाए कि वे मध्यप्रदेश में कम तापमान वाली संरक्षण सुविधा के बारे में तुरंत जानकारी प्राप्त करें और बिना किसी देरी के तुरंत अदालत में इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। र