ब्रह्मांड में मिली सोने की फैक्टरी, धरती पर लाने की जुगत में वैज्ञानिक

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। ब्रह्मांड में सोने की फैक्टरी है। यह खबर सुनकर आप चौंक गए होंगे। दरअसल, वैज्ञानिकों ने सोने की उत्पत्ति को लेकर बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया है। एक रिसर्च पेपर में कहा गया है कि अंतरिक्ष में जहां भी भीषण धमाके या तारे आपस में टकरा रहे हैं, वहां भारी मात्रा में सोना पैदा हो रहा है। इसे धरती पर लाना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती है।

हमेशा इंसानों के लिए आर्कषण का केंद्र रहा सोना 

पीली धातु यानी सोना हमेशा इंसानों के लिए आर्कषण का विषय रहा है। यह ऐश्वर्य का प्रतीक भी माना जाता है। वैज्ञानिकों ने सोने को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। एस्ट्रोफिजिकल जनरल लेटर्स में छपे रिसर्च पेपर में कहा गया है कि पृथ्वी पर मौजूद सोने का एक-एक कण अरबों साल पहले अंतरिक्ष में हुए भीषण धमाकों की देन है। रिसर्च पेपर के अनुसार यह पीली धातु किसी जादुई प्रक्रिया से नहीं, बल्कि मरे हुए तारों के आपस में टकराने से पैदा हुई है। आसान शब्दों में इसे समझें तो कहा जा सकता है कि आप जो सोना पहनते हैं, वह असल में मरे हुए तारों की राख है। इसका मतलब है कि सोना मेड इन अर्थ नहीं, बल्कि मेड इन ब्रह्मांड है। इस खबर को सुनकर आप कहेंगे कि सोना तो खदानों से आता है। इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि करीब 4 अरब साल पहले, जब पृथ्वी बन रही थी तो उस समय यह धधकते लावे का गोला थी। उसी समय अंतरिक्ष से उल्कापिंडों की भारी बारिश हुई थी। इन उल्कापिंडों के अंदर अंतरिक्ष में बना हुआ सोना छिपा था। तब ज्यादातर सोना पृथ्वी के केंद्र में समा गया। उसके बाद हुए उल्कापिंडों के हमलों ने सोने को ऊपरी परत पर बिखेर दिया, जिसे आज हम खदानों से निकालते हैं।
तारों में बनते हैं लोहा या तांबा जैसी धातुएं 

वैज्ञानिकों के अनुसार लोहा या तांबा जैसी धातुएं तारों के भीतर सामान्य रूप से बन सकती हैं। वहीं सोना बनने के लिए ब्रह्मांड को एक महा-विस्फोट की जरूरत होती है। विज्ञान के अनुसार, सोना केवल दो स्थितियों में ही बनता है। पहला, जब दो बेहद घने न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं तो एक भयंकर विस्फोट होता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में किलोनोवा कहते हैं। घने न्यूट्रॉनों के टकराने से इतनी ऊर्जा पैदा होती है कि भारी तत्व जैसे सोना और प्लेटिनम पैदा होते हैं। इसका दूसरा तरीका यह है कि जब कोई विशाल तारा अपनी उम्र पूरी करके फटता है, तो उस मलबे से भी सोने के कण निकलते हैं। वैज्ञानिकों का अनुसार सोने की फैक्ट्री आज भी बंद नहीं हुई है। अंतरिक्ष में कहीं न कहीं तारे आज भी टकरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में भारी मात्रा में सोना पैदा हो रहा है। यह धरती से इतनी दूर है कि वहां से लाना मुश्किल काम है।
सोने के महंगे होने के पीछे के कारण

सोने के इतने महंगे होने के पीछे वैज्ञानिकों का कहना है कि चूंकि, न्यूट्रॉन तारों की टक्कर बहुत दुर्लभ होती है, इसलिए पूरे ब्रहांड में सोना बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। यही कारण है कि यह इतना महंगा है। इसका दूसरा कारण यह भी है कि सोना इसलिए कीमती है क्योंकि पूरे ब्रह्मांड में इसके बनने की शर्तें बहुत कठिन हैं। यह एक दुर्लभ ब्रह्मांडीय घटना का नतीजा है। दूसरी ओर सवाल उठता है कि क्या सोने को लैब में बनाया जा सकता है। इसका जवाब है कि इसे लैब में बनाया जा सकता है, लेकिन यह काफी महंगी प्रक्रिया है। एक ग्राम सोना बनाने में करोड़ों रुपये खर्च हो जाएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोना बनाने के लिए परमाणु रिएक्टरों का प्रयोग करना होगा।