जन प्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। समंदर की गहराई में ऐसी चीज मिली है जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। यह आज से पहले कभी नहीं देखी गई थी। शोधकर्ताओं को समुद्र के भीतर बेहद शक्तिशाली न्यूट्रान मिला है। यह किसी ज्ञात खगोलीय घटना से मेल नहीं खाता। यह जहां से आया है उस पिंड को सूरज से 1 अरब गुना ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है।
शोध को मिली बड़ी चुनौती
विज्ञान ने इतनी तरक्की हासिल कर ली है कि वैज्ञानिक किसी कण के बारे में बात सकते हैं कि यह किस ग्रह का हिस्सा है या नहीं। अब विज्ञान के इस शोध को बड़ी चुनौती मिली है। भूमध्य सागर की गहराइयों में स्थित केएम 3 नेट टेलिस्कोप ने एक बेहद शक्तिशाली न्यूट्रिनो का पता लगाया है। वैज्ञानिकों ने इस कण का नाम खोजकर्ता टेलिस्कोप के नाम से मिलता-जुलता रखा है। इसे केएम 3-230213 ए रखा गया है। इसकी ऊर्जा 220 पीईवी (पेटा-इलेक्ट्रॉन वोल्ट) मापी गई है। यह ऊर्जा कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यह हमारे सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सीलेटर लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर की क्षमता से भी कहीं अधिक है। बता दें कि आमतौर पर हमारा सूरज भी न्यूट्रिनो को बाहर फेंकता रहता है। वहीं अब जो नया कण मिला है यह सूरज से निकलने वाले न्यूट्रिनो की तुलना में एक अरब गुना ज्यादा ऊर्जावान है। इसको लेकर सवाल यह उठता है कि आखिर ब्रह्मांड में ऐसी कौन सी मशीन है, जो इतने पावरफुल कण पैदा कर रही है। यह पूरी रिपोर्ट फिजिकल रिव्यू लेटर्स में छपी है। नई रिसर्च के अनुसार यह किसी साधारण तारे का काम नहीं है, बल्कि यह एक प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल के फटने का नतीजा हो सकता है।
विशाल तारे के मरने के बाद बनते हैं ब्लैक होल
वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया आमतौर पर उन ब्लैक होल्स के बारे में जानती है जो किसी विशाल तारे के मरने के बाद बनते हैं। वहीं प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल इससे बिल्कुल अलग हैं। ये अभी सिर्फ एक थ्योरी है। माना जाता है कि ये बिग बैंग के तुरंत बाद बने थे, जब ब्रह्मांड बहुत घना और गर्म था। मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने बताया था कि ब्लैक होल से धीरे-धीरे रेडिएशन निकलता रहता है। वैज्ञानिक भाषा में इस पूरी प्रक्रिया को रेडिएशन सिद्धांत कहा जाता है। पुरानी और नई जांचों में पाया गया है कि ब्लैक होल जितना छोटा होता है, वह उतना ही ज्यादा गर्म होता है। वह उतनी ही तेजी से ऊर्जा छोड़ता है। जब ये ऊर्जाकण लगातार बाहर निकलते रहते हैं तो छोटा ब्लैक होल अपनी शक्ति खोने लगाता है ऐसे में वह ज्यादा गर्म होते जाते हैं। अंत में एक ऐसा वक्त आता है जब वे एक जोरदार धमाके के साथ नष्ट भी हो जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि केएम 3-230213 ए न्यूट्रिन इसी तरह के किसी ब्लैक होल के अंतिम क्षणों की उपज है।
डार्क चार्ज का किया जिक्र
रिसर्च में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने इसमें डार्क चार्ज का जिक्र किया है। बता दें कि डार्क चार्ज भी इलेक्ट्रॉन है। यह अभी तक सिर्फ कागजों पर ही मौजूद है। रिसर्चर माइकल बेकर और उनकी टीम का कहना है कि ये ब्लैक होल क्वासी-एक्सट्रीमल अवस्था में पाए जाते हैं। इसका मतलब है कि इनमें द्रव्यमान के मुकाबले चार्ज यानी आवेश की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। यही कारण है कि अंटार्कटिका में मौजूद आइसक्यूब टेलिस्कोप इसे पकड़ नहीं सका। आइसक्यूब की सीमा 10 पीईवी तक ही है, वहीं के एम 3 नेट इससे कही ज्यादा ताकतवर है। इसलिए इस टेलीस्कोप ने इस आवेशित कण को पकड़ने में सफलता हासिल की है।





