जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि सेंगर की अपील को आउट आॅफ टर्न सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर की अपील और पीड़िता द्वारा सजा बढ़ाने की अपील दोनों को एक साथ सुना जाए।

बता दें कि सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने इस पर सुनवाई की। दिल्ली हाई कोर्ट इससे जुड़े पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़ी याचिका को पहले ही खारिज कर चुका था। सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह अपनी 10 साल की सजा में से 7 साल पहले ही काट चुके हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दोष सिद्धि के खिलाफ अपील की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को तय है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि इसे पहले भी सुना जा सकता है। बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के बजाय धारा 304 यानी गैर इरातन हत्या के तहत दोषी ठहराया था। इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील लंबित है।

2018 में पीड़िता के पिता को हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वहीं उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने आरोप लगाया था कि यह सामान्य मौत नहीं थी, बल्कि साजिश के तहत हिरासत में उनकी हत्या हुई थी। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया था कि कुलदीप सिंह सेंगर के दबाव में पीड़िता के पिता को प्रताड़ित किया गया। 30 अक्टूबर 2017 को सेंगर ने माखी थाने में पीड़िता और परिवार के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। 03 अप्रैल 2018 को सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर और उसके साथियों पर पीड़िता के पिता पर हमला का मामला दर्जकिया गया था। 04 अप्रैल 2018 को इस मारपीट मामले में पीड़िता के पिता के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में उनकी हालत बिगड़ती गई और अंतत: उनकी मृत्यु हो गई।





