अमेरिका-ईरान में जंग तय, बेनतीजा रही न्यूक्लियर वार्ता

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान में जंग लगभग तय मानी जा रही है। दोनों पक्ष झुकने को तैयार नहीं है। सैन्य तनाव के बीच जिनेवा में अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर वार्ता बेनतीजा रही। यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली। इसी बीच यूएस ने 24 घंटे में पश्चिम एशिया को 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान भेज दिए हैं। साथ ही युद्धपोत भी रवाना कर दिया है। वहीं ईरान ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वही समुद्री रास्ता बंद कर दिया है, जहां से दुनिया को तेल सप्लाई होती है। इस रास्ते पर उसने मिसाइलें भी दागी हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में बातचीत का नया दौर खत्म हो गया है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली। परोक्ष वार्ता बेनतीजा रही। वहीं कूटनीतिक बातचीत को लेकर ताजा बयान सामने आया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से तय की गई मुख्य शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उनके अनुसार ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान अभी इन शर्तों पर खुलकर सहमति देने को तैयार नहीं दिख रहा। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका अभी भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो आगे क्या करना है- इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे।

अब खबर आई कि अमेरिका ने अपने दो युद्धपोत पश्चिम एशिया में तैनात किए हैं। जिसके बाद आशंका हुई कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिका ने बीते 24 घंटे में 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान पश्चिम एशिया भेजे हैं। इसे अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास अपनी नौसैन्य और वायु सेना की तैनाती बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि बीते हफ्ते ही अमेरिका ने अपने सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को पश्चिम एशिया में तैनात किया है। साथ ही यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही पश्चिम एशिया में तैनात है।

इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबाने वाला हथियार ईरान के पास है। उन्होंने अमेरिका की सैन्य ताकत को भी चुनौती दी और कहा कि कभी-कभी दुनिया की सबसे मजबूत मिलिट्री पर भी ऐसा हमला हो सकता है कि वह फिर से उठ न सके। खामेनेई का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस ऐलान के बाद आया है जब दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड कैरिबियन से मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी।

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की ओर फायरिंग अभ्यास शुरू कर मिसाइलें दागीं। स्ट्रेट आॅफ होरमुज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव है। दूसरी तरफ, अमेरिका भी इस इलाके में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है।  ईरान ने घोषणा की है कि उसके अर्ध सैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने फारस व ओमान की खाड़ी स्थित होर्मुज स्ट्रेट में अभ्यास शुरू कर दिया है। ईरान के अंदर और उसके तट व द्वीप के साथ दागी गई मिसाइलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने लक्ष्यों को भेदा। यह जलमार्ग क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग है। यहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। ईरान का कहना है कि यह अभ्यास अमेरिकी सैन्य शक्ति के विरोध में है। अमेरिका ने यहां अपने दो विमानवाहक पोत लगा रखे हैं। बता दें कि स्ट्रेट आॅफ होरमुज फारस की खाड़ी को गल्फ आॅफ ओमान और अरब सागर से जोड़ता है। यह ईरान और ओमान को अरब सागर से जोड़ता है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई सिर्फ 21 मील यानी लगभग 33 से 34 किलोमीटर है।  ईरान बार-बार कहता है कि अगर हम पर हमला हुआ तो हम इसे बंद कर देंगे। लाइव फायरिंग से वह दिखा रहा है कि हमारे पास क्षमता है और हम तैयार हैं।


बता दें कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत बढ़ाई है। इस समय वहां दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 12 युद्धपोत, सैकड़ों लड़ाकू विमान और कई रक्षा प्रणालियां मौजूद हैं। पिछले कुछ दिनों में 150 से अधिक अमेरिकी विमान भी वहां उड़ान भर चुके हैं और पिछले 24 घंटों में हथियारों और उपकरणों की आपूर्ति तेज कर दी गई है। अमेरिका ने 50 उन्नत लड़ाकू विमान भी मिडिल ईस्ट में तैनात किए हैं।