बिहार में शराब बंदी से मिलेगी राहत !, एनडीए समर्थकों उठाई समीक्षा की मांग 

जन प्रवाद, ब्यूरो।
पटना, बिहार। बिहारवासियों खासकर शराब के शौकीनों के लिए जल्द ही अच्छी खबर आने वाली है। बिहार में भारपा के सहयोग से चल रही नीतीश सरकार इन दिनों शराब बंदी की फजीहत खेल रही है। अब तो सहयोगी दलों ने भी राज्य में एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग उठाने लगे हैं। 
बता दें कि इस कानून के चलते बिहार में अब तक करीब 8 लाख से अधिक लोग कानूनी मुकदमों में फंसे हुए हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस कानून की समीक्षा करने की मांग की है। इस मामले में उन्हें एनडीए के एक और घटक दल का साथ मिल चुका है।


जीतन राम मांझी का दावा है कि शराब बंदी से राज्य को भारी राजस्व का नुकसान हो रही है। यही नहीं गरीब तपके के लोग मुकदमों में फंसे हुए हैं। जानकारी के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएमएल) के एक विधायक ने भी कानून की समीक्षा की मांग की है।
बता दें कि पत्रकारों से वार्ता के दौरान जीतनराम मांझी ने कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शराब तो नहीं है लेकिन ड्रग्स हो ही रहा है। समीक्षा की मांग करते हुए मांझी ने कहा कि शराबबंदी के बाद से बिहार में पिछले 8 सालों में करीब 4 लाख वंचित वर्गों पर मामले दर्ज किए गए हैं। 
उनका कहना है कि बिहार में शराबबंदी के कारण जहरीली शराब पहुंच रही है और गरीबों को मार रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी शराब गरीबों की उम्र कम कर रही है और उन्हें बीमारियों का शिकार बना रही है। मांझी ने कहा कि शराब नीति गलत नहीं है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में बहुत सारी खामियां हैं।


कुशवाहा की पार्टी ने भी उठाए सवाल
मांझी से एक दिन पहले राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएमएल) ने भी सदन में इसी तरह की मांग की थी। पार्टी विधायक माधव आनंद ने विधानसभा में मांग की थी कि बिहार सरकार ने इसे खारिज कर दिया। आनंद ने नीतीश कुमार की मौजूदगी में मुद्दा उठाते हुए कहा था कि कानून पारित हो गया, लेकिन शराब हर डिलीवरी चैनल से उपलब्ध है। उन्होंने राजस्व के नुकसान की भी बार रखी थी। 
इससे लगता है कि नीतीश कुमार शराबबंदी पर सोच सकते हैं। इस कानून में बदलाव किया जा सकता है।