यूक्लिड टेलीस्कोप से बड़ा खुलासा, धीरे-धीरे ठंडा होकर निष्क्रिय हो रहा ब्रह्मांड 

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के यूक्लिड टेलीस्कोप ने बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड अब धीरे-धीरे ठंडा होकर निष्क्रिय होता जा रहा है। 2 मिलियन से ज्यादा गैलेक्सियों के अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। गणना के अनुसार ब्रह्मांड के तापमान में बड़ी गिरावट आई है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी यानी ईएसए के टेलीस्कोप ने वो सच सामने ला दिया है जिसे वैज्ञानिक से लेकर कोई भी खगोलशास्त्री सुनना नहीं चाहता है। खोजकर्ताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि ब्रह्मांड अब ठंडा होकर मरने की ओर बढ़ रहा है। 175 वैज्ञानिकों की टीम ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने 2 मिलियन से ज्यादा गैलेक्सी यानी आकाशगंगाओं का तापमान रिकॉर्ड किया। इस जांच में पाया कि पिछले 10 अरब वर्षों में ब्रह्मांड लगातार ठंडा होता जा रहा है। अध्ययनकर्ताओं ने यूक्लिड टेलीस्कोप और पुराने स्पेस टेलीस्कोप के डेटा को मिलाकर ब्रह्मांड की अब तक की सबसे सटीक थर्मल मैपिंग तैयार की। इस अध्ययन में पता चला कि अब गैलेक्सियों में तारों के बनने की रफ्तार बहुत घट गई है। इसका मतलब है कि ब्रह्मांड का गोल्डन एज खत्म हो चुका है। यह अब ठहराव की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। इस बारे में वैज्ञानिकोें ने अनुमान जताया है कि यह ठहराव हमारे ब्रह्मांड के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इससे पुराने तारे मरते जाएंगे और नए तारों का जन्म नहीं होगा। 

ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कॉस्मोलॉजिस्ट डगलस स्कॉट ने इस बार में कई अनुमान जाहिर किए। उन्होंने कहा कि अब से ब्रह्मांड ठंडा और निष्क्रिय होता जाएगा। गैलेक्सियों में मौजूद डस्ट और उसकी तापमान क्षमता अरबों सालों से घट रही है, इसका मतलब है कि तारे बनने का दौर खत्म हो चुका है। स्कॉट के अनुसार जिन गैलेक्सियों का औसत तापमान 35 केल्विन यानी माइनस 238 डिग्री सेल्सियस था, अब वो करीब 25 केल्विन रह गया है। सुनने में छोटा अंतर लग सकता है, लेकिन ये गिरावट तारे बनने की प्रक्रिया पर सीधा असर डालती है। स्कॉट का मानना है कि जब किसी गैलेक्सी में तापमान घटता है, तो वहां नई स्टार फॉर्मेशन लगभग रुक जाती है।

बता दें कि तारे गैस और डस्ट से बनते हैं। जब यह पदार्थ अपने ही गुरुत्वाकर्षण से सिकुड़ता है, तो अंदर न्यूक्लियर फ्यूजन शुरू होती है। एक तारा जन्म लेता है. वही तारे बाद में सुपरनोवा बनकर विस्फोट करते हैं। जिससे नया डस्ट और गैस बनता है। इससे नई पीढ़ी के तारे पैदा होते हैं. लेकिन जब किसी गैलेक्सी में गैस और डस्ट खत्म हो जाएं, तो वहां जीवनचक्र रुक जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई गैलेक्सियां पहले ही क्वेंच्ड यानी स्टार-फॉर्मेशन से वंचित हो चुकी हैं। इसके कई कारण हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि या तो गैलेक्सियां आपस में टकराकर गैस की सप्लाई खो देती हैं, या फिर सुपरमैसिव ब्लैक होल्स उनके गैस बादलों को अंतरिक्ष में उड़ा देते हैं। इस रिसर्च से साफ हुआ कि हमारा ब्रह्मांड धीरे-धीरे स्टार-फॉर्मेशन के ईंधन से खाली हो रहा है। टीम के लीड रिसर्चर राइली हिल ने कहा कि हमने अब तक की सबसे मजबूत सांख्यिकीय मापें की हैं। इतने विशाल डेटा सेट के साथ पहली बार हम ब्रह्मांड के तापमान और उसकी उम्र का सटीक विश्लेषण कर रहे हैं।