जनप्रवाद टीम। स्वर्ग और नरक की कल्पना अब केवल धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं रही बल्कि वैज्ञानिक भी इसकी खोज कर रहे हैं। अब हार्वर्ड के एक पूर्व वैज्ञानिक को इस दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। उन्होंने फिजिक्स के फॉर्मूले से स्वर्ग की खोज कर ली है। उन्होंने यह भी इंगित किया है कि ब्रह्मांड में इस जगह पर है स्वर्ग मौजूद है।
स्वर्ग को लेकर लोगों के मन में अनगिनत सवाल
सदियों से स्वर्ग को लेकर लोगों के मन में अनगिनत सवाल उठते रहे हैं। यह अबूझ पहेली थी कि क्या ब्रह्मांड में स्वर्ग जैसा कोई लोक मौजूद है? क्या इंसान विज्ञान की मदद से उस जगह तक पहुंच सकता है, जिसे सदियों से आस्था और कल्पना से जोड़ा गया था। धर्मग्रंथों में स्वर्ग को एक ऐसी जगह के रूप में परिभाषित किया गया है जहां शांति, आनंद और अमरता मौजूद है। वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर देखा जाए तो अब तक अंतरिक्ष में किसी स्वर्ग जैसे लोक के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। यह बात अलग है कि वैज्ञानिक लगातार चन्द्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर जीवन की खोज कर रहे हैं। अब हार्वर्ड के एक पूर्व वैज्ञानिक को स्वर्ग की खोज की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है।
लेख में स्वर्ग के बारे में विस्तार से दी जानकारी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रोफेसर ने अपने एक लेख में स्वर्ग के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने अपने लेख में अंतरिक्ष विज्ञान, फिजिक्स और धर्म के संयोजन से ब्रह्मांड में स्वर्ग के होने की सच्चाई बताई है। इस हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का नाम डॉ. माइकल गुइलिन है। बता दें कि गुइलिन ने फिजिक्स, मैथ्स और एस्ट्रोनॉमी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। उनके अनुसार ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों में स्वर्ग छिपा हुआ है। गुइलिन ने अपने अध्ययन में वैज्ञानिकों और धार्मिक लोगों को दो समूहों में बांटा है। कई पुस्तकों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने एस्ट्रोनॉमी के फॉर्मूलों की मदद से इस सवाल के जवाब को खोजने का प्रयास किया है।
लगातार बढ़ रहा है ब्रह्मांड का आकार
गुइलेन के अनुसार ब्रह्मांड का आकार लगातार बढ़ रहा है। जैसे-जैसे गैलेक्सी दूर जा रही है उसकी स्पीड भी बढ़ती जा रही है। उनकी यह थ्योरी साल 1929 में एडविन हबल की खोजों पर आधारित है, जिन्होंने पहली बार बताया गया था कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। इसके अलावा उनका ये भी मानना है कि ब्रह्मांड में एक ऐसी सीमा है, जहां तक इंसान या कोई रॉकेट नहीं पहुंच सकता है। इस सीमा को वैज्ञानिक भाषा में कॉस्मिक होराइजन कहा जाता है। उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के एक सिद्धांत के जरिए कहा कि यहां तक सिर्फ प्रकाश ही पहुंच सकता है। धार्मिक ग्रंथों में भी स्वर्ग को ऊपर बताया गया है, यानी सबसे ऊंची जगह को भगवान का निवास माना जाता है। गुइलिन का कहना है कि कॉस्मिक होराइजन वही ऊपर वाली जगह है। विज्ञान भी मानता है कि जो ब्रह्मांड में हमें जो दिखता है, उसके बाहर भी बहुत कुछ मौजूद है। वहां तक देख पाना फिलहाल असंभव है। गुइलिन के अनुसार स्वर्ग इसी अनदेखे ब्रह्मांड का हिस्सा हो सकता है। यहां सबसे गौर करने वाली बात यह है कि यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल पाठकों को सामान्य जानकारी देना है। जनप्रवाद स्वर्ग की पुष्टि नहीं करता है।





