जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। सौरमंडल के सबसे अहम ग्रह सूर्य ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। इस समय सूर्य में बड़ी हलचल हो रही है। इस ग्रह पर लगातार 27 महाशक्तिशाली सौर तूफान आए हैं। इसको लेकर नासा से लेकर इसरो तक सकते में आ गए हैं। इसरो ने तो भीषण ब्लैक आउट की चेतावनी भी जारी कर दी है।
सूरज के बिना सौरमंडल की कल्पना नहीं
सूरज के बिना न केवल हमारी धरती बल्कि पूरे सौरमंडल की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस समय सूरज के अंदर एक ऐसी घटना हो रही है, जिसने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। सूरज में लगातार सौर तूफान आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि ये तेज लपटें धरती तक पहुंच रही हैं। फरवरी से सूरज ने लगातार पावरफुल सोलर फ्लेयर्स छोड़े हैं। जिसको लेकर इसरो से लेकर नासा तक सभी स्पेस एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। एजेंसियों ने कहा है कि भारत सहित दुनिया भर में रेडियो ब्लैक आउट या पॉवरग्रिड फेल होने की संभावना है। बता दें कि सोलर फ्लेयर्स सूर्य के अंदर होने वाले विस्फोटों की वजह से होते हैं। ये सोलर फ्लेयर्स चुंबकीय गुणों से भरे होते हैं, इन्हें सौर तूफान भी कहा जाता है।
धरती पर बढ़ सकती हैं भू-चुंबकीय गतिविधि
वैज्ञानिकों का मानना है कि आज धरती पर भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ सकती है। इसके कारण सामान्य इलाकों में भी नॉर्दर्न लाइट्स यानी आॅरोरा दिखाई दे सकते हैं। बता दें कि सूर्य पर आने वाले सौर तूफान जब पृथ्वी के वातावरण में टकराते हैं तो हलचल पैदा करते हैं। इस तरह के सोलर फ्लेयर्स से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की बहुत ज्यादा मात्रा निकलती है, जो लगभग तुरंत पृथ्वी तक पहुंच जाती है। इसकी वजह से भारत की इसरो सहित दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। बता दें कि सोलर फ्लेयर्स सूरज के अंदर उठने वाले विस्फोटों के चलते उठते हैं। ये फ्लेयर्स चुंबकीय गुणों से भरे होते हैं और सौरमंडल में बढ़ते हैं। ये सौर तूफान जब पृथ्वी के वातावरण में टकराते हैं तो हलचल पैदा करते हैं।
संभावित रेडियो ब्लैक आउट की स्थिति
इसरो के अनुसार इस संभावित रेडियो ब्लैक आउट की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एजेंसियों के अनुसार तीव्र सौर तूफान से अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को भारी खतरा है। इसरो के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से अधिक कार्यरत भारतीय उपग्रहों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सौर गतिविधि में वृद्धि से संचार, नेविगेशन और उपग्रह पेलोड में व्यवधान उत्पन्न होने का खतरा है। इसरो ने बताया है कि रेडियो ब्लैक आउट की प्रबल संभावना है। इसरो के सभी उपग्रहों की बहुत बारीकी से निगरानी की जा रही है। इससे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की संचार सेवाएं बाधित होने की किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
सक्रिय क्षेत्र 14366 से अशांति की शुरुआत
सूर्य में वर्तमान अशांति की शुरुआत सक्रिय क्षेत्र 14366 के अचानक तीव्र होने से हुई। पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में बार-बार विस्फोट हुए, जिससे चार अत्यंत शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स उत्पन्न हुए। जिनमें एक 8.1 श्रेणी की ज्वाला भी शामिल है। यह अब तक की सबसे शक्तिशाली ज्वाला है। भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला, आदित्य-एल1 इस तूफान की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित आदित्य-एल1 भारत को सौर विस्फोटों के प्रभावों का आकलन कर सूचनाएं दे रहा है। आदित्य-एल1 से प्राप्त डेटा वैज्ञानिकों को सौर विकिरण, चुंबकीय क्षेत्र और ऊर्जावान कणों को वास्तविक समय में मापने में मदद कर रहा है। जिससे इसरो को समय रहते चेतावनी जारी करने और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अवसंरचना की सुरक्षा करने में सहायता मिल रही है।





